उत्तराखंड के जंगलों में लगभग हफ्तेभर से लगी आग कार्बेट टाइगर रिजर्व के पास पहुंच गई। सीटीआर के सटे उत्तराखंड वन विकास निगम के डिपो के पास झाड़ियों में शनिवार दिन में 11 बजे आग लगने से विभाग में खलबली मच गई।
हालांकि विभागीय अधिकारियों की तत्परता के चलते कुछ देर आग बुझा दी गई और डिपो में रखी करोड़ों रुपये की बेशकीमती लकड़ी जलने से बच गई। बता दें कि कार्बेट पार्क का बिजरानी जोन, रामनगर, तराई पश्चिमी वन प्रभाग और पवलगढ़ कंजर्वेशन रिजर्व के जंगलों में आग से अभी तक कई करोड़ों की वन संपदा जलकर राख हो चुकी है। वन्य जीव भी इस आग से खतरे की जद में हैं।
शनिवार की सुबह निगम के आमडंडा स्थित डिपो के पास आग लगने की सूचना कर्मचारियों ने वन निगम के आरएम जीसी पंत को दी। जिसके बाद आरएम द्वारा विभागीय टैंकर व दमकल कर्मियों के सहयोग से झाड़ियों में लगी आग पर काबू पाया।
...तो करोड़ों का हो जाता नुकसान
उत्तराखंड के जंगल धधक रहे हैं।
आरएम पंत ने बताया यदि आग निगम में प्रवेश करती तो 20 करोड़ से अधिक रुपये का नुकसान हो सकता था। बहरहाल सब कुछ ठीक है। अग्निशमन अधिकारी अब्दुल रहमान ने बताया आग वन विकास निगम में आने से पहले बुझा दी गई, जिससे इमारती लकड़ी जलने से बच गई।
उधर वन विकास निगम के पंजीकृत ढुलान संघ के प्रवक्ता निशांत पपनै ने बताया निगम ने लॉट के आसपास कभी झाड़ियों के कटान का कार्य नहीं किया गया है। जिससे पहले ही खतरे का अंदेशा लगाया जा रहा था।
उन्होंने बताया झाड़ियों के कटान के बारे में कई दफा अधिकारियों से वार्ता भी की गयी, लेकिन उसे अनसुना कर दिया गया। कार्बेट टाइगर रिजर्व सहित तमाम वन प्रभागों के जंगल इन दिनों आग से धधक रहे हैं। दूसरी तरफ जंगलों को आग से बचाने के लिए करोड़ों की लागत से खरीदे गए अग्निशमन यंत्र जंक खा रहे हैं।