धान क्रय केंद्र पर संसाधनों की कमी और विभागीय कर्मचारियों की मनमानी किसानों पर भारी पड़ती नजर आ रही है। कुछ दिन पहले डीएम ने धान क्रय केंद्र का निरीक्षण कर दो नए धान खरीद केंद्र खोले जाने के निर्देश दिए थे लेकिन विभागीय लोगों की लापरवाही के चलते किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रविवार अमर उजाला टीम ने पड़ताल की तो पता चला कि चार दिनों से करीब एक दर्जन किसान धान न बिक पाने के कारण खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि धान खरीदे जाने के लिए नंबर लगा रहे हैं। जो किसान चंद घंटों पहले आते हैं वह सेटिंग कर अपना धान पहले बेच देते हैं।
सदर विकासखंड के अशोक सिंह का कहना है कि उनका करीब 40 क्विंटल धान है। चार दिनों से मंडी में रुके हैं। कई बार विभागीय अधिकारियों से धान जल्दी खरीदने की बात कही, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
क्षेत्र के गांव चमरौआ निवासी रजपाल कुमार का कहना है कि उन्हें मंडी समिति में रुके हुए पांच दिन बीत गए हैं लेकिन अभी तक उनका नंबर नहीं आया। उन्होंने बताया कि रविवार को ही धान लेकर मंडी आए कुछ किसानों का धान पहले खरीद लिया गया।
ककोर निवासी किसान मनोज सिंह का कहना है कि चार दिन पहले मंडी हुए थे। ऐसी सर्दी में वह खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं। अगली फसल की बुआई करने के लिए रुपयों की जरूरत है लेकिन अभी तक धान न बिकने से काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मिर्जापुर निवासी किसान लाखन सिंह का कहना है कि संसाधनों की कमी के कारण एक दिन में 2-3 किसानों का ही धान खरीदा जा सकता है। चार दिनों से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। अगर जल्द ही धान नहीं बिका तो वह प्राइवेट केंद्र पर बेचने को मजबूर होंगे।
दो अन्य धान खरीद केंद्र जल्द ही मंडी समिति में खुल जाएंगे। अगर किसानों का धान मानक के अनुरूप नहीं खरीदा जा रहा है तो क्रय केंद्र के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - सुधांशु शेखर चौबे, जिला विपणन अधिकारी