पंजाब मंडी बोर्ड के वाइस चेयरमैन और आढ़तियों के राज्य अध्यक्ष रविंदरपाल सिंह चीमा ने रविवार को कहा कि किसान अपनी गलतियों के कारण सुसाइड कर रहे हैं। चीमा स्थानीय अग्रवाल धर्मशाला में एकत्रित आढ़तियों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि नशा और किसानों की फिजूलखर्ची ही उनकी खुदकुशियों का कारण बन रही है। किसान शादियों में बढ़-चढ़ कर खर्च करते हैं, इसके अलावा उनके लड़के चिट्टे नशे की चपेट में आकर फिजूलखर्ची करते हैं। बैंक भी किसानों को थोड़ी सी जमीन पर 10-10 लाख रुपये की लिमिट बनाकर कर्ज दे देती है। जब कर्ज वापस नहीं होता तो बैंक उनकी जमीनें कुर्क करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि बैंक भी किसानों को हद से ज्यादा कर्ज न दें।
चीमा ने कहा कि किसान की खुदकशी के बाद उसके परिवार को मुआवजा और नौकरी देना गलत है, यह स्कीम किसान को खुदकुशी के लिए उकसाने के बराबर है। यह स्कीम तुरंत बंद करनी चाहिए और किसान को खुदकुशी करने से पहले ही कोई बड़ी राहत देकर उसकी जिंदगी और परिवार को तबाह होने से बचाना चाहिए।
चीमा ने बरनाला के गांव जोधपुर में कर्ज तले दबे मरहूम किसान दर्शन सिंह के बेटे बलजीत सिंह बल्लू और पत्नी बलवीर कौर की खुदकशी का जिम्मेदार किसान संगठनों को ठहराया। चीमा ने कहा कि प्री-प्लानिंग के तहत किसान संगठनों के कुछ नेताओं ने बल्लू ओर बलबीर कौर को खुदकुशी के लिए उकसाया। उन्होंने मीडिया को एक वीडियो दिखाया और कहा कि एक हरी पगड़ी वाला व्यक्ति छत पर खडे़ बलजीत सिंह बल्लू के कान में कुछ कहकर आता है, फिर उसको कीडे़मार दवा पकड़ाकर आता है।
इससे स्पष्ट है कि किसान संगठनों के कुछ नेताओं ने ही बलवीर कौर और बल्लू को उकसाया। ऐसे में मामला आढ़तियों के बजाय किसान नेताओं पर होना चाहिए। सुसाइड करने वाले किसानों की जेबों से जो सुसाइड नोट मिलते हैं, वह भी किसान संगठनों के नेता खुद ही लिखते हैं।
चीमा ने कहा कि मौके पर खुदकुशी का तमाशा देख रहे सिविल और पुलिस अधिकारियों पर अलग से मामला दर्ज होना चाहिए। चीमा ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन को सात मई तक का समय देते कहा कि अगर इससे पहले आढ़तियों पर दर्ज किया झूठा मामला रद्द न हुआ तो सात मई को बरनाला में राज्य स्तरीय संघर्ष का बिगुल बजाया जाएगा।
इस अवसर पर चीमा के साथ आढ़तिया एसोसिएशन के जिला प्रधान दर्शन सिंह संघेडा, धीरज कुमार ददाहूर बरनाला, रामधारी कांसल संगरूर, जसवंत राय बल्लू बठिंडा, जसविंदर सिंह राणा पटियाला, मघर सिंह मुल्लांपुर लुधियाना और शाम लाल मानसा मौजूद थे।