यूएस की ओर से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर पाबंदी की मार झेल रहे ईरान को एक्सपोर्ट करके शहर के कुछ निर्यातक उलझ गए हैं। डॉलर में लेनदेन की पाबंदियों की वजह से बैंकों ने जीआर - 1 फार्म क्लियर करने से इंकार कर दिया है। जिसकी वजह से निर्यातकों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। निर्यातकाें को एक्सपोर्ट पर सरकार की ओर से मिलने वाला एमईआईएस (फोकस) लाइसेंस भी उलझ गया है। निर्यातकों ने पीएमओ से मामले में दखल की गुहार लगाई है।
यूएस ने ईरान पर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर पाबंदी लगा रखी है। जिसकी वजह से उसके साथ डॉलर में लेनदेन नहीं हो सकता। शहर के निर्यातकों का कहना है कि पिछले दो से तीन साल में ईरान के बायर्स ने हैंडीक्राफ्ट्स फेयर में अच्छी हिस्सेदारी दर्ज कराई है। बीते दो साल में ईरान ने बड़े पैमाने पर मुरादाबाद के निर्यातकों को आर्डर भी दिए हैं।
निर्यातकों का कहना है कि ईरान से सीधे डॉलर में पेमेंट नहीं होने की वजह से ईरानी बायर्स ने बाया दुबई पेमेंट कराए। कुछ ने अन्य देशों के डॉलर में पेमेंट कराई। लेकिन ईरान को एक्सपोर्ट के ज्यादातर मामलों में जीआर- 1 फार्म फंस गए हैं। यह फार्म शिपमेंट के बाद रिजर्व बैंक को जाता है।
ईरान पर पाबंदियों की वजह से इन फार्मों को क्लियर नहीं किया गया है। निर्यातकों का कहना है कि जीआर 1 फार्म क्लियर नहीं होने की वजह से उन्हें मिलने वाला फोकस लाइसेंस अटक गया है। ईरान को एक्सपोर्ट करने वाले कुछ निर्यातकों का कहना है कि आरबीआई ने अब ऐसे मामलों की फाइलें खोलना शुरू कर दी हैं जिनमें जीआर 1 फार्म लंबित हैं।
ऐसा होने पर एक्सपोर्ट लाइसेंस पर भी खतरा मंडरा सकता है। मुरादाबाद से ईरान को करीब 300 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ है। जिसका तीन प्रतिशत फोकस लाइसेंस भी निर्यातकों को इसी वजह से नहीं मिल पा रहा है। निर्यातकों का कहना है कि पीएमओ में इस मामले को रखकर ईरान के साथ निर्यात को सरल बनाने की मांग की है।