पंजाब के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लिए ड्रैस कोड लागू कर दिया गया है। शिक्षकों के भड़कीले कपड़े पहनने पर पाबंदी लगा दी गई है। उन्हें सादे कपड़ों में आना होगा। स्कूल शिक्षा विभाग का मानना है कि शिक्षकों को देखकर बच्चों की आदतें बिगड़ने की संभावना बनी रहती है।
विभाग ने भड़कीले कपड़े पहनकर स्कूल आने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्यवाही का मन बनाया है। हालांकि कार्यवाही क्या की जाएगी इसके बारे में नहीं बताया गया है। सूत्रों के अनुसार पंजाब सरकार को शिकायतें मिली हैं कि कुछ सरकारी स्कूलों में शिक्षक ऐसे कपड़े पहन कर आते हैं जिनसे बच्चों की आदतें बिगड़ने का अंदेशा बना रहता है। अध्यापक हमेशा ही बच्चों के लिए रोल माडल का काम करते हैं।
सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं 34 लाख विद्यार्थी
पंजाब में सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में डेढ़ लाख से ज्यादा अध्यापक हैं। इन स्कूलों में 34 लाख के करीब विद्यार्थी पढ़ते हैं। इसलिए अध्यापकों पर पढ़ाने के साथ-साथ यह भी मुख्य जिम्मेवारी है कि उनका रहन-सहन भी बच्चों को बेहतर दिशा में ले जाए। सरकार का मानना है कि अध्यापकों के विभिन्न तरह के फैशन वाले कपड़े बच्चों में वैसा ही माहौल बनाते हैं। इससे गरीब परिवारों के बच्चे अपने परिजनों को भी ऐसे ही कपड़े सिलवाने के लिए कई बार मजबूर करते हैं।
ड्रेस कोड लागू किया : महानिदेशक
स्कूल शिक्षा विभाग के महानिदेशक काहन सिंह पन्नू ने ऐसी शिकायतें मिलने की पुष्टि की है। उनका कहना है कि अध्यापकों के लिए बच्चों की तरह ही ड्रेस कोड लागू कर दिया गया है। किसी रंग आदि की बंदिश नहीं होगी लेकिन अध्यापकों को स्कूलों में सादा लिबास पहनकर आना होगा। ऐसा नहीं होने पर बच्चों की आदतें बिगड़ने की संभावना है।