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'आतंकवादी नहीं, चीन में अल्पसंख्यक मुसलमानों के हमदर्द हैं डोल्कुन ईसा'

Sun, 24 Apr 2016 12:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, धर्मशाला
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तिब्बत मूल के आयोजनकर्ताओं का कहना है कि ईसा चीन में अल्पसंख्यक मुसलमानों की जंग लड़ रहे हैं इसलिए उन्हें चीन सरकार बदनाम कर रही है।
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मैकलोडगंज में 28 अप्रैल से लोकतंत्र विषय पर आयोजित विश्व सम्मेलन को लेकर विवाद और गहरा गया है। चीन और ताइवान सरकार ने डोल्कुन ईसा को आतंकवादी घोषित कर उनके खिलाफ इंटरपोल का रेड कार्नर नोटिस जारी कर रखा है। जबकि तिब्बत मूल के आयोजनकर्ताओं का कहना है कि ईसा चीन में अल्पसंख्यक मुसलमानों की जंग लड़ रहे हैं इसलिए उन्हें चीन सरकार बदनाम कर रही है।
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चीन के लिए तो दलाईलामा भी आतंकवादी हैं। मजे की बात यह है कि इस आयोजन की कमान दलाईलामा या तिब्बती सरकार के हाथ में नहीं है। हां इस सम्मेलन को दलाईलामा का समर्थन जरूर है। मैकलोडगंज में इंटर एथनिक इंटरफेथ लीडरशिप कांफ्रेंस नाम से हो रहे सम्मेलन में लोकतंत्र विषय पर दुनिया भर के बुद्धिजीवी चर्चा करेंगे।

कहा जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र में जैश-ए-मोहम्मद के मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करवाने के प्रस्ताव को चीन की ओर से वीटो किए जाने का बदला भारत सरकार ईसा को वीजा देकर निकाल रहा है। चीन भी भारत के इस कदम का विरोध कर रहा है।
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तिब्बतियन सेंटर फोन ह्यूमन राइट एन डेमोक्रेसी के प्रवक्ता तेंजिन मिंजे ने अमर उजाला को बताया कि डोल्कुन ईसा को भारत की ओर से वीजा जल्द जारी करने के फैसले का उनकी संस्था स्वागत करती है। चीन ड्रामाबाजी के लिए मशहूर है। पठानकोट आतंकी हमले के मास्टरमाइंड आतंकी मसूद अजहर का यूएन में समर्थन कर चीन की काफी किरकिरी हुई है।

ऐसे में अब अपनी छवि सुधारने के मकसद से चीन डोल्कुन का बहाना बनाकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। डोल्कुन शांतिप्रिय नेता हैं, यह पूरी दुनिया जानती है। उन्होंने मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए कड़ा संघर्ष किया है।
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आतंकी डोल्कुन नहीं, बल्कि चीन है: सेपेन

आयोजक स्टूडेंट फॉर फ्री तिब्बत संस्था के निदेशक सेपेन ने कहा कि आतंकी डोल्कुन नहीं, बल्कि चीन है।
आयोजक स्टूडेंट फॉर फ्री तिब्बत संस्था के निदेशक सेपेन ने कहा कि आतंकी डोल्कुन नहीं, बल्कि चीन है। चीन तो दलाईलामा को भी अलगाववादी और आतंकी कहता है। डोल्कुन के पास चीन का पासपोर्ट है। वह वाशिंगटन स्थित विश्व उइघुर कांग्रेस संस्था के महासचिव हैं। डोल्कुन अपनी संस्था के उपाध्यक्ष उमर केनात और उईघर अमेरिकन एसोसिएशन के अध्यक्ष इलशात इसन प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आ रहे हैं।

दलाईलामा से मिल सकते हैं डोल्कुन
चर्चा है कि डोल्कुन सम्मेलन के दौरान बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा से मिलने उनके निवास स्थान पर भी जा सकते हैं। दलाईलामा कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। वे राजनीतिक और अन्य तरह की गतिविधियों से अब दूर ही रहते हैं, लेकिन उनसे मुलाकात हुई तो चीन में खलबली मच सकती है।

कौन हैं डोल्कुन ईसा
डोल्कुन ईसा चीन के मुस्लिम बाहुल्य शिनजियांग प्रांत के इस्लामी उइगर जाति के जनवादी नेता हैं। वे पाक से आज़ाद होने में संघर्षरत बलूचिस्तान की तरह साम्राज्यवादी चीन के चंगुल से अपने प्रदेश शिनजियांग के स्वतंत्रता आंदोलन के पुरोधा हैं। चीन की आबादी के सामने उइगर मुसलमानों की आबादी न के बराबर है। लेकिन उनके विरोधी तेवर और स्वर के कारण चीन के बहुसंख्यक उन्हें मिटा देना चाहते हैं।

इसके लिए चीन ने तीन तरीके अपनाए गए हैं। उइगर युवतियों की शादी जबरन चीनी हान युवकों से कराई जा रही है। तुर्की भाषा की जगह चीनी मंडारिन को अनिवार्य कर दिया गया है और मुसलमानों के मजहबी दस्तूर और रिवायतों पर पाबंदी लगाई जा रही है। ईसा इसी का विरोध कर रहे हैं। इसलिए चीन ने उन्हें आतंकवादी घोषित कर दिया है।

क्या कहती है हिमाचल पुलिस
'अभी तक केंद्र सरकार की ओर से कार्यक्रम के संबंध में कोई निर्देश नहीं मिले हैं। स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम को लेकर मंजूरी ली गई होगी। विवादित या इंटरपोल की ओर से रेड कार्नर नोटिस वाले व्यक्ति के आने के संबंध में अगर केंद्र की ओर से सूचना मिलती है तो जरूरी कार्रवाई की जाएगी।'-संजय कुंडू, एडीजीपी कानून व्यवस्था
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