एसपी सिटी को बनाया निशाना
एसपी सिटी रणविजय सिंह को एडीजी के पालतू कुत्ते ने काट लिया था। जिसके बाद एसपी सिटी ने अस्पताल में इंजेक्शन लगवाए। एसपी सिटी का कहना है कि कुत्ता पालतू है, पहले से उन्हें पहचानता है। लेकिन अचानक से कुत्ते ने काट लिया। जिसके बाद उन्होंने अस्पताल में इंजेक्शन लगवाए।
एसपी ट्रैफिक को दी वॉच करने की सलाह
सोमवार रात को मवाना रोड स्थित डिफेंस कालोनी में एसपी ट्रैफिक संजीव बाजपेयी की बेटी को उन्हीं के पालतू कुत्ते ने काट लिया। एसपी ट्रैफिक का पालतू कुत्ता लाफा नस्ल का है। एसपी ट्रैफिक का कहना है कि डॉक्टर ने सलाह दी है कि वह दस दिन तक कुत्ते को वॉच करें। एसपी ट्रैफिक का कहना है कि बेटी को काटने के बाद वह इस कुत्ते को घर में नहीं रखेंगे।
यह कहते हैं डॉक्टर
जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. पीके बंसल का कहना है कि कुत्तों के काटने पर जानकारी न होने केकारण मरीज के पिसी हुई मिर्च लगा दी जाती है, जो कि गलत है। इससे ठीक होने के बजाय घाव में संक्रमण होने का खतरा ज्यादा रहता है। कुत्ते या किसी जानवर के काटने पर 72 घंटे के अंदर एंटी रैबीज वैक्सीन का इंजेक्शन जरूर लगवाना चाहिए। रैबीज बेहद खतरनाक बीमारी है। रैबीज हो जाने के बाद इसका कोई इलाज नहीं है। यह रोग 19 वर्ष तक मरीज को अपनी गिरफ्त में ले सकता है। एक समय ऐसा भी था, जब कुत्ते के काटने पर 16 इंजेक्शन लगवाने पड़ते थे, वह भी पेट में।
कैसे होता है रैबीज
जानवर जैसे कुत्ता, बंदर, लंगूर आदि के काटने से जो लार व्यक्ति के खून में मिल जाती है, उससे रैबीज नामक बीमारी होने का खतरा रहता है। रैबीज रोग सीधे रोगी के मानसिक संतुलन को खराब कर देता है, जिससे रोगी का अपने दिमाग पर कोई संतुलन नहीं रहता है। रैबीज रोगी को सबसे ज्यादा पानी से डर लगता है। रोगी के मुंह से लार निकलती है। रोगी को रोशनी से डर लगता है। यहां तक कि वह भौंकना भी शुरू कर देता है।
रोकथाम: रैबीज रोग की रोकथाम के लिए अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इससे बचाव हो सकता है। नियमानुसार पहला इंजेक्शन 72 घंटे के अंदर, दूसरा तीन दिन बाद, तीसरा सात दिन बाद, चौथा 14 दिन बाद और पांचवा 28 दिन के बाद लगाया जाता है।
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