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सीएम तीर्थ दर्शन यात्रा स्कीम बंद न हुई तो जाएंगे हाईकोर्ट

Sat, 05 Mar 2016 06:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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तख्त श्री हजूर साहिब के लिए विशेष रेलगाड़ी - फोटो : takht shri huzoor sahib, special train
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सीएम तीर्थ दर्शन यात्रा स्कीम बंद करने के लिए पंजाब के मुख्य सचिव, स्टेट ट्रांस्पोर्ट कमिशनर और पर्यटन व सांस्कृतिक विभाग के डायरेक्टर को एक कानूनी नोटिस भेज कर आरोप लगाया गया है कि यह सीधे तौर पर चुनावी साल में वोटरों को घूस देने के समान है। लुधियाना के आरटीआई एक्टिविस्ट कुलदीप सिंह खैहरा ने एडवोकेट एचसी अरोड़ा के माध्यम से कहा है कि यदि यह योजना तुरंत बंद नहीं की गई तो 15 दिन बाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाएगी।
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नोटिस में कहा है कि फरवरी 2017 में पंजाब विधानसभा चुनाव होना है। इससे ठीक एक साल पहले सीएम तीर्थ दर्शन यात्रा स्कीम शुरू करना वोटरों को प्रलोभन देना है। स्कीम को राजनीतिक हित के चलाई योजना करार देते हुए आरोप लगाया गया है कि इसके लिए फंड पंजाब इनफ्र ास्ट्रक्चर बोर्ड (पीआईडीबी) से खर्च किया जा रहा है। यह पैसा विकास कार्यों के लिए है, ऐसे में दूसरी योजना में इस पैसे का इस्तेमाल फंडों में हेरफेर है। नोटिस में कहा गया है कि सरकार ने यह भी तय नहीं किया है कि इस मुफ्त तीर्थ यात्रा के लिए किन लोगों का चयन करना है। ऐसे आभाव में आरोप लगाया है कि सत्ताधारी शिअद-भाजपा नेता व विधायक अपने चहेतों को ही मुफ्त तीर्थ यात्रा करवा रहे हैं।

आरोप है कि जिस तरीके से ट्रेनों में भर कर लोगों को तीर्थ दर्शन कराए जा रहे हैं, उससे प्रतीत होता है कि सत्ताधारी गंठबंधन अपना वोट बैंक बना रहा है। यह आरोप भी लगाया है कि इस मुफ्त सैर में उन लोगों को भी शामिल किया जा रहा है, जो आर्थिक तौर पर काफी समृद्ध हैं. कहा है कि पीआईडीबी का पैसा करदाताओं का पैसा है, लिहाजा इसे किसी कथित राजनीतिक हित के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कहा है कि यदि योजना का लाभ देना ही था तो इसके लिए मापदंड तय किया जाता कि केवल गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को मुफ्त यात्रा कराई जाए। नोटिस में कहा है कि सरकार को धार्मिक मामलों में खुद को शामिल नहीं करना चाहिए।
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नोटिस में यह आरोप भी लगाया है कि एक तरफ कई विभागों के कर्मचारियों और शिक्षकों के वेतन के लिए सरकार के पास पैसे नहीं है। नौकरियां आउटसोर्सिंग के माध्यम से दी जा रही हैं। सरकारी नौकरी में आने पर पहले दो साल केवल मूल वेतनमान ही दिया जा रहा है, ऐसे में सरकारी पैसे का तीर्थ दर्शन यात्रा के लिए इस्तेमाल करने को गलत करार दिया गया है। कहा है कि यही पैसा कैंसर पीड़ितों के इलाज, स्कूलों में स्वच्छ पानी व शौचालय मुहैया कराने व क्लासरूम्स की मरम्मत आदि के लिए खर्च किया जा सकता था। इन दलीलों के साथ सरकार को चेताया गया है कि यदि 15 दिन के भीतर योजना बंद नहीं हुई तो हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाएगी।
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