500 और 1000 रुपये के नोटों पर पाबंदी के बाद प्रॉपर्टी रजिस्ट्री का धंधा मंदा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले के बाद साइबर सिटी में प्रॉपर्टी रजिस्ट्री 90 फीसदी तक घट गई है। इसका असर अब सरकारी खजाने पर पड़ने लगा है।
गुरुग्राम के जिस तहसील दफ्तर में रजिस्ट्री के लिए लोगों की लंबी लाइनें लगतीं थीं, अब वहां केवल सन्नाटा पसरा है। केवल दस फीसदी लोग वहां रजिस्ट्री कराने के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें गिफ्ट रजिस्ट्री, ट्रस्ट और ट्रांसफर रजिस्ट्री मुख्य रूप से शामिल हैं।
गुरुग्राम जिले में पांच तहसील गुरुग्राम, मानेसर, सोहना, पटौदी और फर्रूखनगर सब-रजिस्ट्रार में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री होती थी। इन पांच तहसीलों में औसतन 3350 रजिस्ट्री प्रतिदिन होती थी।
इनमें सबसे ज्यादा रजिस्ट्री गुरुग्राम और सोहना में होती थी। इनमें करीब 70 फीसदी रजिस्ट्री केवल प्रॉपर्टी की होते थे। इनमें रिहायशी, कमर्शियल, फार्म हाउस और कृषि योग्य भूमि शामिल है।
नोटबंदी के बाद अब इसमें भारी गिरावट आ गई है। करीब 90 फीसदी प्रॉपर्टी रजिस्ट्री का काम ठप हो गया है। बीपीओ और आईटी हब के लिए मशहूर गुरुग्राम काले धन का गढ़ है। प्रॉपर्टी के कारोबार के जरिये यहां सबसे अधिक काले धन की खपत होती थी।
नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल के अध्यक्ष प्रवीण जैन कहते हैं कि नोटबंदी के बाद रियल एस्टेट कारोबार में जो उछाल आ रहा था वो अब बंद हो गया है। जब बिक्री ही नहीं है तो प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कहां से होगी।