21 सितंबर को मनोज लापता हुआ। तीन अक्तूबर को उसकी गुमशुदगी अपहरण में तरमीम हो गई। मनोज को ढूंढने में पुलिस और सर्विलांस टीम ने कोई गंभीरता नहीं बरती। मनोज के फोन की अंतिम लोकेशन जानी गंगनहर के पास थी। पुलिस थोड़ी सी भी जहमत उठाती तो शायद उसका शव वारदात के एक या दो दिन बाद मिल जाता। दरोगा खुद ही अपने बेटे को ढूंढने में लगे रहे। उनके परिवार व रिश्तेदारों को अंदेशा नहीं था कि मनोज के साथ कोई ऐसी वारदात कर सकता है।
शराब पीकर चला गया होगा
मनोज शराब पीता था। वह शराब पीकर कहीं चला गया होगा, बस यही धारणा लिए पुलिस बैठी रही। दरोगा ने जब भी बेटे को बरामद करने की मांग की, तभी रटा रटाया जवाब मिलता था कि मनोज खुद गया होगा और खुद ही आ जाएगा। मनोज सटोरियों के पास जाता है, यह जानकारी दरोगा और पुलिस को भी थी। लेकिन सटोरियों से पूछताछ करने की भी जहमत नहीं उठाई। पुलिस का दावा है कि मनोज ई-रिक्शा से फिरोज के पास गया था। ई-रिक्शा चालक सोनू से भी पूछताछ की।
परिवार में मचा कोहराम
हत्यारोपियों ने वारदात कबूल कर ली। मनोज का शव नहीं मिला। मनोज का छोटा भाई बॉबी, दो बहनों और माता पिता का रो रोकर बुरा हाल है। परिवार और रिश्तेदार मनोज के शव को ढूंढ रहे है। पुलिस का कहना है कि बुधवार को गंगनगर में सर्च अभियान चलेगा।
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