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नहर से बरामद हुआ दरोगा के बेटे का शव, खुले घूम रहे थे हत्यारोपी, सामने आई पुलिस की लापरवाही

Wed, 10 Oct 2018 12:31 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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हत्यारोपी - फोटो : अमर उजाला
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दरोगा के बेटे मनोज की हत्या के मामले में ब्रह्मपुरी पुलिस भी कम लापरवाह नहीं रही। हत्या दूसरे समुदाय के युवकों ने की, इसका खुलासा होने पर भी पुलिस 18 दिनों तक क्यों खामोश रही, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। हालांकि अब मनोज का शव पुलिस ने जानी नहर से बरामद कर लिया है। लेकिन पुलिस की कार्रवाई पर कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

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तारीख 21 सितंबर और दिन शुक्रवार था। रोजाना की तरह मनोज लड़खड़ाता हुआ फिरोज के किराए के घर पहुंचा था। जहां सट्टे की खाईबाड़ी हो रही थी। फिरोज, इमरान व रामबाबू के साथ दिल्ली सीलमपुर के रहीम सहित करीब आठ लोग थे। दोनों भाई रात 1:30 बजे तक मनोज को शराब पिलाते रहे। वह बेहोशी की हालत में हुआ तो दोनों भाइयों ने पहले उसको उठाकर जमीन पर पटका। उसके बाद फिरोज व रामबाबू ने पैर पकड़े और इमरान ने मनोज का गला दबाकर उसे मार डाला। 

पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने हत्या की रात क्या हुआ, यह सिलसिलेवार बताया। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने बताया कि हत्या के बाद चार लोग वहां से चले गए थे। फिरोज अपनी स्विफ्ट गाड़ी लेकर आया था। फिरोज, इमरान, रामबाबू और रहीम ने मनोज का शव गाड़ी में रखा। आधी रात के बाद दो बजे जानी गंगनहर पर ले गए। शव को झाड़ी में रखा और उसकी तलाशी ली। जेब में मनोज का मोबाइल था। जिसको इमरान ने निकाला और झाड़ी में फेंका। आरोपियों ने शव को गंगनहर में फेंका और निकल गए थे। 
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चेहरे पर नहीं थी चिंता
पुलिस के अनुसार वारदात 21 सितंबर हुई थी। तभी से हत्यारोपी दोनों भाई रोजाना की तरह सट्टे की खाईबाड़ी करने में लगे थे। उनके चेहरे पर चिंता की कोई लकीर नहीं थी। 18 दिनों तक चारों हत्यारोपी खुलेआम घूम रहे थे। फिरोज के पास मनोज आता था, इसकी जानकारी भी सबको पता थी। लेकिन कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं था। हत्यारोपियों ने वारदात के बारे में बताया, तब जाकर पुलिस की नींद टूटी। 

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21 सितंबर को मनोज लापता हुआ। तीन अक्तूबर को उसकी गुमशुदगी अपहरण में तरमीम हो गई। मनोज को ढूंढने में पुलिस और सर्विलांस टीम ने कोई गंभीरता नहीं बरती। मनोज के फोन की अंतिम लोकेशन जानी गंगनहर के पास थी। पुलिस थोड़ी सी भी जहमत उठाती तो शायद उसका शव वारदात के एक या दो दिन बाद मिल जाता। दरोगा खुद ही अपने बेटे को ढूंढने में लगे रहे। उनके परिवार व रिश्तेदारों को अंदेशा नहीं था कि मनोज के साथ कोई ऐसी वारदात कर सकता है। 

शराब पीकर चला गया होगा 
मनोज शराब पीता था। वह शराब पीकर कहीं चला गया होगा, बस यही धारणा लिए पुलिस बैठी रही। दरोगा ने जब भी बेटे को बरामद करने की मांग की, तभी रटा रटाया जवाब मिलता था कि मनोज खुद गया होगा और खुद ही आ जाएगा। मनोज सटोरियों के पास जाता है, यह जानकारी दरोगा और पुलिस को भी थी। लेकिन सटोरियों से पूछताछ करने की भी जहमत नहीं उठाई। पुलिस का दावा है कि मनोज ई-रिक्शा से फिरोज के पास गया था। ई-रिक्शा चालक सोनू से भी पूछताछ की। 

परिवार में मचा कोहराम 
हत्यारोपियों ने वारदात कबूल कर ली। मनोज का शव नहीं मिला। मनोज का छोटा भाई बॉबी, दो बहनों और माता पिता का रो रोकर बुरा हाल है। परिवार और रिश्तेदार मनोज के शव को ढूंढ रहे है। पुलिस का कहना है कि बुधवार को गंगनगर में सर्च अभियान चलेगा। 

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