कंचौसी इलाका खोया की अवैध भट्ठियों के लिए बदनाम है। इन भट्ठियों पर मिलावटी खोया बनाया जाता है। इस खोया की बिक्री जिले के अलावा कानपुर तक होती है। खोया बनाने के लिए भट्ठी की इजाजत खाद्य एवं सुरक्षा विभाग से लेनी पड़ती है। इसकी इजाजत नहीं ली गई।
कंचौसी व आसपास के ग्रामीण इलाकों में सिंथेटिक पाउडर व केमिकल से खोया बनाया जा रहा है। इलाकेे में खोया बनाने की कई भट्ठियां धधक रही हैं। यहां बना खोया जिले के अलावा कानपुर व दूसरे जिलों में भेजा जाता है। रोज तकरीबन 50 क्विटंल खोया की खपत है।
इस खोया की बिक्री 250 रुपये से लेकर 280 रुपये किलो तक है। खोया में अरारोट, आलू, शकरकंद, स्टार्च, मैदा की मिलावट की जाती है। दूध में मिलावट के लिए डिटरजेंट, रिफाइंड, मिल्क पाउडर मिलाया जाता है। खोया व दूध से बनी खाद्य सामग्री खराब न हो, इसके लिए हाइड्रोपराक्साइड व फार्मलीन मिलाया जाता है। कानपुर में बिक्री के लिए दूध की खेप कंचौसी, झींझक व रूरा से ही जाती है।
इस तरह करें खोया की पहचान
खोया-पनीर की जांच के लिए इसके छोटे से हिस्से को पानी में उबालें। इसके बाद ठंडा होने दें। इसमें आयोडीन बिलियन टिंचर के घोल की दो-तीन बूंदें मिलाएं। आयोडीन की बूंद डालने पर बैगनी रंग सामने आता है तो यह सामग्री मिलावटी है। खोया का रंग न बदलने पर यह असली है।
मिलावटी दूध की ऐसे करें जांच
दूध को फटने से बचाने के लिए फार्मलीन मिलाया जाता है। मिलावटी दूध की पहचान के लिए पोटैशियम कार्बेनाइट की 5-6 बूंदें डालें। लाल रंग सामने आने का मतलब है कि दूध में मिलावट है। इसके साथ ही 10 मिली दूध में इतना ही पानी मिलाएं। झाग आने पर इसमें डिटरजेंट की मिलावट सामने आ जाएगी।