संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरगढ़। उपमंडल की प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी मनीषा ने चेक बाउंस मामले में सुनवाई के दौरान आरोपी अनिल को बरी किया है। अदालत ने आरोपी को यह कहते हुए बरी किया है कि शिकायतकर्ता कंपनी आरोपी पर बकाया कानूनी देनदारी साबित करने में नाकाम रही।
मामले के अनुसार श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी ने बहादुरगढ़ के झील मोहल्ला निवासी अनिल के खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत शिकायत दायर की थी। कंपनी का आरोप था कि आरोपी ने वर्ष 2018 में ईको वाहन खरीदने के लिए 1.80 लाख रुपये का लोन लिया था।
किस्तें जमा नहीं कराने के बाद आरोपी ने देनदारी चुकाने के लिए 1.80 लाख रुपये का चेक दिया जो बैंक में लगाने पर फंड्स इंसफिशिएंट के कारण बाउंस हो गया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता कंपनी यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि वास्तव में आरोपी पर कितनी राशि बकाया थी।
आरोपी के वकील रोहित यादव ने बताया कि इस मामले में सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि कंपनी ने न तो जरूरी मूल दस्तावेज पेश किए और न ही लेनदेन की पूरी समयावधि को स्पष्ट रूप से साबित किया।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि आरोपी ने अपने बचाव में संभावनाओं के आधार पर पर्याप्त संदेह खड़ा कर दिया। इसी कारण आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।