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आरटीआईः नहीं मिलेगी सूचना

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सूचना अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत सही जानकारी न देने पर प्रशासन के अधिकारियों को सेंट्रल इंफॉरमेशन कमीशन (सीआईसी) ने जमकर फटकार लगाई जा रही है।
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पिछले एक महीने में सीआईसी ने प्रशासन के दो अधिकारियों और एक सरकारी कालेज प्रिंसिपल को नोटिस जारी करते हुए कार्रवाई की है। सीआईसी जहां प्रशासन के अधिकारियों पर सख्त हुआ है, वहीं शहर के लोग सूचना अधिकार कानून के प्रति काफी जागरूक हो रहे हैं।

इस कानून के तहत जानकारी मांगने के लिए आने वाले आवेदनों की संख्या तो बढ़ ही रही है, साथ ही जवाब न मिलने पर सीआईसी के पास अपील दायर करने वालों की भी संख्या में इजाफा हो रहा है।
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सूचना अधिकार कानून के तहत मांगी गई जानकारी को छिपाने पर सीआईसी ने सेक्टर-11 स्थित पीजी गवर्नमेंट कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. जेएस रघु को शोकॉज नोटिस जारी किया है।

सीआईसी ने चंडीगढ़ प्रशासन के बिजली विभाग के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (एसई) एमपी सिंह को आरटीआई के तहत मांगी गई सही जानकारी न देने और सीपीआईओ के तौर पर अपील की सुनवाई ठीक से न करने पर ट्रेनिंग लेने के निर्देश जारी किए हैं।

वहीं, सीआईसी ने पीसीएस अधिकारी और चंडीगढ़ के पूर्व डीपीआई (स्कूल) उपकार सिंह को भी सूचना अधिकार कानून की ट्रेनिंग देने और उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के आदेश जारी किए हैं। साथ ही शिक्षा विभाग पर 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

केस नंबर 1 : कालेज प्रिंसिपल बनाम शिक्षक
जानकारी के मुताबिक सेक्टर-11 स्थित पीजी गवर्नमेंट कालेज के शिक्षक राजीव भंडारी ने अपनी एसीआर की प्रति सूचना अधिकार कानून के तहत मांगी थी। साथ ही अपने कुछ सह शिक्षकों की एसीआर की प्रति भी मांगी थी।

उन्होंने अगस्त, 2012 में इस कानून के तहत आवेदन किया था। कालेज के प्रिंसिपल और सीपीआईओ डॉ. जेएस रघु से भंडारी को जब जवाब नहीं मिला तो उन्होंने सीआईसी के पास अपील दायर कर दी।

सीआईसी ने अपने निर्देश में डॉ. रघु को शोकॉज नोटिस जारी कर 11 नवंबर तक जवाब देने को कहा है। उनसे पूछा गया कि सूचना अधिकार कानून के तहत जानकारी न देने पर क्यों न उन पर जुर्माना लगाया जाए?

केस नंबर 2 : पूर्व डीपीआई उपकार बनाम संगीता
सीआईसी ने पूर्व डीपीआई उपकार सिंह पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के आदेश जारी करते हुए उन्हें फर्स्ट एपिलेट अथॉरिटी के पद से हटाने को कहा था। सीआईसी दीपक संधू ने यह आदेश सेक्टर-20 स्थित सरकारी स्कूल की हेडमिस्ट्रेस संगीता रानी की अपील पर जारी किए थे।

अपने आदेश में संधू ने उपकार सिंह को सूचना अधिकार कानून को लेकर ट्रेनिंग देने की बात भी कही थी। संगीता रानी ने नवंबर, 2011 में अपने वेतन से संबंधित जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी से मांगी थी। जवाब से संतुष्ट न होने पर उन्होंने डीपीआई (स्कूल) के पास अपील दायर की क्योंकि वह फर्स्ट एपीलेट अथॉरिटी थे।

संतुष्ट न होने पर उन्होंने सीआईसी के पास अपील दायर की। सीआईसी के आदेश पर भी जब उनकी अपील पर फैसला नहीं लिया गया तो उन्होंने सिंतबर, 2012 में दोबारा से सीआईसी के पास अपील दायर की थी। इसे सीआईसी ने काफी गंभीरता से लिया।

केस नंबर 3 : एसई बनाम राकेश सूद
बिजली विभाग के एसई एमपी सिंह को भी सीआईसी ने फर्स्ट एपीलेट अथॉरिटी के तौर पर ट्रेनिंग लेने का निर्देश दिया है। पंचकूला के एक निवासी राकेश सूद ने बिजली विभाग के सीपीआईओ से 11 केसी से संबंधित लाइन को लेकर दो कार्यालयों के बीच हुए पत्राचार के संबंध में जानकारी मांगी थी।
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जानकारी न मिलने पर सूद ने सीआईसी के पास अपील दायर की। इस अपील पर सुनवाई करते हुए सीआईसी ने सिंह को न सिर्फ सूद को तीन सप्ताह में संबंधित जानकारी देने को कहा बल्कि उन्हें चेतावनी देते हुए ट्रेनिंग लेने को भी कहा।
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