दुर्लभ काले हिरन को साइकिल पर पशु चिकित्सालय ले जाते वन कर्मी।
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दुर्लभ और लिप्त हो रही प्रजाति का काला हिरन आवारा कुत्तों का शिकार हो गया। जंगल से भटककर गांव की बस्ती में आ जाना मौत की वजह बना। वन और पुलिस कर्मियों ने घायल हिरन को तत्काल अस्पताल नहीं पहुंचाया। तड़पने के बाद रात में ही उसकी मौत हो गई। वन विभाग ने शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद दफना दिया।
सोमवार की रात करीब आठ बजे वयस्क काला हिरन जंगल में अपने झुंड से भटक कर तिंदवारी थाना क्षेत्र के महेदू गांव आ गया। यहां आवारा कुत्तों ने उसे घेर लिया। हिरन देर तक इधर-उधर भागता रहा। कुत्तों ने कई बार उस पर हमला कर लहूलुहान कर दिया। इसी बीच ग्रामीणों ने कुत्तों को भगाया और यूपी-100 पुलिस तथा मूंगुस गांव में स्थित वन विभाग की पौधशाला में वन दरोगा राम प्रसाद को फोन से सूचना दी। वन दरोगा रात में ही अपने साथ वन रक्षक राजेंद्र कुमार को लेकर महेदू पहुंचे और लहूलुहान मरणासन्न हिरन को लाकर कुछ दूरी पर स्थित भिरौड़ा गांव में पशु बाड़े मेें छोड़ दिया। मंगलवार को सुबह वन कर्मी साइकिल के कैरियर पर बड़ी सींग वाले इस काले हिरन को लादकर तिंदवारी स्थित पशु चिकित्सालय लाए। यहां डाक्टरों ने हिरन को मृत घोषित कर दिया।
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. नंदलाल कुशवाहा ने बताया कि सुबह करीब 11 बजे वन दरोगा राम प्रसाद हिरन को मृत अवस्था में लाए थे। हिरन के गले के पास गहरा घाव था। एक पैर में फ्रैक्चर था। अत्यधिक खून बह जाने और तत्काल इलाज न मिलने से हिरन की मौत हो गई। उधर, वन दरोगा ने बताया कि सोमवार को रात आठ बजे चिल्ला थानाध्यक्ष ने उन्हें फोन पर हिरन के घायल होने की सूचना दी थी। वह तत्काल वन रक्षक के साथ महेदू पहुंच गए थे। उसको वह ला रहे थे लेकिन उसकी मौत हो गई। इसलिए रात में भरौड़ा गांव में रख दिया। मंगलवार को पशु चिकित्सालय में शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद मूंगुस गांव की पौधशाला में दफना दिया गया। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में हिरन हैं। इसमें कुछ काले हिरन भी हैं। ये वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित हैं। इन हिरनों की संख्या घट भी रही है।