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श्रीकृष्ण की भक्ति पर लगी पाबंदी तो छोड़ दिया यूक्रेन, देवरूपा ने कहा- पूजा करने पर मिलती है सजा

Sun, 07 Apr 2019 08:48 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
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यूक्रेन निवासी देवरूपा - फोटो : अमर उजाला
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इस्कॉन मंदिर की ओर से रथयात्रा में शामिल होने यूक्रेन निवासी देवरूपा ने जब श्रीकृष्ण और श्रीराम के नाम की धुन सुनाई तो सभी मंत्रमुग्ध होकर झूमने लगे। उनके साथ ऐसोजेन ने सुरीले अंदाज में भजन सुनाकर लोगों को भाव विभोर कर दिया। दोनों से बातचीत हुई तो उन्होंने भारत को आध्यात्मिक देश बताते हुए यहां बसने की अपनी दास्तां सुनाई।

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देवरूपा ने बताया कि क रीब 12 साल पहले वह अमेरिका, मालदीव और रूस के अपने साथियों के साथ भारत के वृंदावन में आईं थीं। यहां उन्होंने श्रीमद्भागवत गीता और रामायण को पढ़ा। वृंदावन में गुरु से दीक्षा लेकर यूक्रेन लौट गईं। यूक्रेन में जब उन्होंने पहली बार जगराता किया और प्रभु भजन गाए तो उन पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई। तब उन्हें यूक्रेन के सख्त कानून के बारे में पता चला। उन्हें पता चला कि वहां के निवासियों को श्रीकृष्ण और श्रीराम की पूजा करने पर पाबंदी है। इसके अलावा भारत से यूक्रेन गए लोग भी सार्वजनिक तौर पर प्रभु नाम का गुणगान नहीं कर सकते हैं, जिसके बाद वह यूक्रेन को छोड़कर वृंदावन के आश्रम में बस गईं। 

उन्होंने कहा कि विदेश, विकास के क्षेत्र में भारत से भले ही 50 वर्ष आगे हों, लेकिन अध्यात्म के क्षेत्र में सैकड़ों वर्ष पीछे हैं। बोलीं, करीब 12 वर्षों से भारत आने-जाने के दौरान उन्होंने यहां का काफी हद तक रहन-सहन और भाषा सीख ली है। उनके साथ मौजूद रूस से आए ऐसोजेन ने बताया कि अब वह भी भारत के अध्यात्म में रम चुके हैं। हालांकि साल में एक बार वह अपने घर पहुंचकर वहां के लोगों को रामायण पुस्तक भेंट करते हैं।

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