संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा का नारा देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में छुछकवास के सात जवान थे। देश की आजादी के लिए घर छोड़कर गांव के लोगों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की एक आवाज पर हथियार उठा लिए थे। हालांकि उनके वंशजों का कहना है कि आज सरकार उनका सम्मान नहीं करती है। किसी भी आयोजन में उनको बुलाया नहीं जाता है। गांव के लोग सम्मान करते हैं।
ऐतिहासिक गांव छुछकवास का देश की आजादी में बड़ा योगदान रहा है। गांव के लोगों ने आजाद हिंद फौज में रहकर देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी। गांव के 40 से ज्यादा युवा वर्तमान में भी देश के अलग-अलग हिस्सों में सेना में विभिन्न पदों पर सेवाएं दे रहे हैं। गांव ने सेना को अब तक मेजर, असिस्टेंट कमांडेंट, सूबेदार और कैप्टन आदि अधिकारी दिए हैं। पिछले साल ही गांव की एक बेटी फ्लाइंग ऑफिसर बनी हैं।
क्षेत्र के लोगों ने 1857 की क्रांति में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। क्रांतिकारियों की मदद करने से लेकर उनको रहने की जगह और रसद पहुंचाने की जिम्मेदारी गांव के लोगों ने उठाई थी। तत्कालीन नवाब अब्दुल रमान ने भी उस समय क्रांतिकारियों का साथ दिया था। इसी की सजा के तौर पर उनको चांदनी चौक क्षेत्र में फांसी पर लटका दिया गया था।
इंसेट
यह थे आजाद हिंद फौज में
आजाद हिंद फौज में गांव के पालाराम, शीशराम, नेतराम, रुघनाथ, गणपत और दलीप थे। गांव के लोगों ने बताया कि देश आजाद होने के बाद आजाद हिंद फौज में रहे उनके बुजुर्ग गांव के लोगों को नेताजी के बारे में बताया करते थे। राजेंद्र सिंह ने बताया कि उनके पिता पालाराम जब नेताजी के बारे में बताते थे तो गर्व से सिर ऊंचा हो जाता था।
कोट्स...
छुछकवास गांव के लोग हमेशा देशभक्त रहे हैं। देश को जब भी जरूरत पड़ी है तो छुछकवास गांव ने हर कदम पर अहम योगदान दिया है। - संदीप
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1857 की क्रांति से लेकर आजादी की लड़ाई और उसके बाद पाकिस्तान और चीन के साथ हुए युद्ध में गांव के जवानों ने भूमिका निभाई है। - रामपाल
आज भी गांव के 40 से ज्यादा युवा सेना में है। ये देश की सेवा कर रहे हैं। सीमाओं और पदों पर वह देश की रक्षा में जुटे हुए हैं। - राहुल यादव
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युवाओं ने देश की आजादी और देश की रक्षा के लिए जो योगदान दिया है। इसके लिए गांव हमेशा खुद को गौरवान्वित महसूस करता रहेगा। - हरविंदर
18jjrp17 छुछकवास गांव की पुलिस चौकी। संवाद
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