आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल (फाइल फोटो)
सहकारी बैंकों में शहर के 60 हजार खाताधारकों के करीब दो सौ करोड़ रुपये फंसे होने की खबर को शहरियों ने ट्विटर और फेसबुक पर खूब शेयर किया। अमर उजाला ने गुरुवार को माई सिटी पेज पर इस मसले को प्रमुुखता से उठाया था। बड़ी संख्या में लोगों ने रिजर्व बैंक के गवर्नर डॉ. उर्जित पटेल के ट्विटर एकाउंट पर अपने विचार लिखकर खबर की कटिंग टैग की।
हालांकि सेंट्रल बोर्ड की दिनभर चली मीटिंग में व्यस्तता की वजह से गवर्नर का एकाउंट पिछले 24 घंटे से रिफ्रेश नहीं हुआ है। इस वजह से उनका कोई रेस्पॉन्स भी नहीं आया है। सहकारी बैंकों के खाताधारकों ने अमर उजाला को फोन करके इस मसले को उठाए जाने के लिए सराहा और अपना दर्द बांटा। खाताधारक रिजर्व बैंक की नीतियों को ही कोस रहे हैं कि इतनी बड़ी व्यवस्था होने के बाद भी जनता का धन क्यों सुरक्षित नहीं?
ये रहे ट्विट
दुखद: जिस तरह से रिजर्व बैंक चुप है, पता नहीं लगता कि आरबीआई काम जनता के लिए कर रही है या सहकारी समितियों और उनके घूसखोर अधिकारियों के लिए।
@राजीव
उर्जित जी, रघुराम राजन जी तो सहकारी बैंकों के लिए कुछ करके गए नहीं। जनता की कमाई पर अधिकारी कुंडली मारे बैठे हैं। क्या आपसे कुछ उम्मीद की जाए?
@अजय
मैं समझ नहीं रहा हूं कि आरबीआई किस तरह से काम कर रहा है। दयनीय। @राघव