प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वच्छता अभियान चल रहा है मगर उनके शहर अहमदाबाद में सड़कों के किनारे जगह-जगह मलबा और कचरा देखा जा सकता है।
सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट के संबंध में दिक्कतों को वहां के नगर निगम के अधिकारी भी मानते हैं। चंडीगढ़ के संदर्भ में गुजरात मॉडल का सवाल उठाने पर अधिकारियों का जवाब है कि कचरा प्रबंधन की दिक्कतें एक जैसी हैं।
खासकर सेग्रीगेशन पर। अहमदाबाद नगर निगम के सोलिड वेस्ट डिपार्टमेंट के डायरेक्टर हर्षाद्रे जे सोलंकी गुजराती मुहावरा कहते हैं कि कौए सभी जगह काले होते हैं।
पीआईबी चंडीगढ़ की ओर से ले जाए गए पत्रकारों के दल के सामने प्रजेंटेशन देते हुए सोलंकी ने बताया कि इस शहर की आबादी तेजी से बढ़ रही है। कंस्ट्रक्शन और इन्फ्रास्ट्रेकचर में बूम है। मलवा उठाने की व्यवस्था है, मगर व्यावहारिक दिक्कते हैं।
मेट्रो की जगह बीआरटीएस कितना कारगर
बीआरटीसी कॉरिडोर
- फोटो : अमर उजाला
साबरमती में डालते हैं कचरा
सोलंकी ने बताया कि कुछ लोग पूजा के बाद का सामान साबरमती नदी में डाल देते हैं। हालांकि उन्होंने पूजा सामग्री के लिए नदी के किनारे बड़े कलश रखवा दिए हैं मगर फिर भी कुछ लोग आस्था की वजह से इनका इस्तेमाल नहीं करते। वे सामग्री नदी में ही फैंकते हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए मुहिम चलाई जा रही है।
मेट्रो की जगह बीआरटीएस कितना कारगर
चंडीगढ़ का मेट्रो प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में हैं। विकल्प के तौर पर बस रेपिड ट्रांजिट सिस्टम (बीआरटीएस) अपनाने की बातें हो रही हैं। दिल्ली में यह फेल हो चुका है मगर अहमदाबाद में सफलता पूर्वक चल रहा है।
अहमदाबाद के बीआरटीएस मॉडल का अध्ययन चंडीगढ़ कर सकता है। वहां एसी बसें और टर्मिनल हैं। बस के आने-जाने पर ही दरवाजे खुलते बंद होते हैं। यह मेट्रो जैसी सुविधा का अहसास कराते हैं।
म्युनिसिपल कार्पोरेशन की स्टेंडिंग कमेटी के चेयरमैन प्रवीन बी पटेल के अनुसार बीआरटीएस का विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर अहमदाबाद को ग्लोबल सिटी बनाता है। हर बस की जानकारी कंट्रोल रूम में रियल टाइम अपडेट होती है।
अहमदाबाद में फैली गंदगी
- फोटो : अमर उजाला
हालांकि इसके रास्ते में कई चुनौतियां हैं। करीब चालीस लाख का सालान घाटा है, जिसे नगर निगम अपने साधनों से पूरा करता है। बीआरटीएस में बसों के लिए अलग लेन है मगर खाली लेन में निजी वाहन चालक भी चले आते हैं।
चंडीगढ़ से गए पत्रकारों के दल को जब इस बस में ले जाया जा रहा था तो एक चौक पर सामने से ट्रक आ जाने से बस को रोकना पड़ा। हालांकि ऐसी घुसपैठ को रोकने के लिए नगर निगम की ओर से व्यवस्था की गई है।
पूर्व सैनिकों को भर्ती कर नगर निगम ने चौराहों पर निगरानी के लिए तैनात किया है। मगर उनके पास कार्रवाई के अधिकार नहीं हैं। वे सिर्फ लोगों को समझाते हैं कि वे बीआरटी लेन में अपने वाहन न चलाएं।
बीआरटीएस सिस्टम के तहत रोज 2500 बसें करीब डेढ़ लाख यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं। न्यूनतम किराया 4 रुपये और अधिकतम 29 रुपये है। इससे नगर निगम को रोज 19 लाख 25 हजार रुपये की आय होती है। -प्रवीन बी पटेल, चेयरमैन, स्टैंडिंग कमेटी