तेजी से सूख रही चंडीगढ़ की शान सुखना लेक को बचाने का तरीका मिल गया है। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने बताई दो तरकीबें।
उन्होंने बताया कि सुरेंद्र नगर का ढाकीं प्रोजेक्ट करीब पौने दो करोड़ लोगों को पेयजल पहुंचा रहा है। ये लोग पहले मीलों दूर से पानी लाते थे। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी बड़े गर्व से बताते हैं कि इस साल गुजरात में काफी कम बारिश हुई है, मगर हमें कोई चिंता नहीं है।
हाल ही में पीआईबी चंडीगढ़ की ओर से अहमदाबाद गए पत्रकारों के दल से विशेष मुलाकात में रूपाणी ने बताया कि यह दुनिया का सबसे बड़ा वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट से हम 66 मीटर की ऊंचाई तक बसे गांवों में भी पानी पहुंचा रहे हैं। कुल 360 किलोमीटर लंबी तीन पाइप लाइनों से पानी लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।
सूखे में भी कलकल बह रही साबरमती नदी
इस साल कम बारिश होने से भले ही हमारी सुखना लेक संकट में है मगर राजस्थान से निकलने वाली साबरमती नदी इस सूखे में भी गुजरात में कलकल बह रही है। इसके पीछे प्लानिंग और विजन है। यह रेन वाटर हार्वेस्टिंग और ट्रीटेड वाटर से जल संकट दूर करने का कारगर मॉडल है।
साबरमती पर कई डैम बनाकर बारिश के दिनों का पानी इकट्ठा किया जाता है। यही पानी अहमदाबाद के लोगों के लिए पेयजल सप्लाई का मुख्य स्रोत है। इसी से सीख लेते हुए सुखना के कैचमेंट एरिया में भी छोटे-छोटे डेम बनाकर बरसाती पानी की हार्वेस्टिंग की जा सकती है और इन्हें इंटरलिंक कर संकट के समय लेक तक पानी लाया जा सकता है।
अहमदाबाद नगर निगम की एन्वायरमेंट इंजीनियर दर्शना पटेल के अनुसार रोज 6000 लाख लीटर सीवरेज का ट्रीटेड पानी भी अहमदाबाद से साबरमती में छोड़ा जाता है। इसका बीओडी 20 से भी कम होता है। साबरमती का यह पानी कृषि में उपयोग हो रहा है।
vijay rupani
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इस साल बारिश बहुत ही कम हुई है। सौराष्ट्र और कक्ष के 70 फीसदी डैम सूख चुके हैं मगर हमें कोई चिंता नहीं है। दुनिया के सबसे बड़े। ढाकीं प्रोजेक्ट की वजह से हम लोगों के घर तक पानी पहुचाने में सक्षम हैं।
-विजय रूपाणी, मुख्यमंत्री, गुजरात