बीएचयू में छात्रा से छेड़खानी के बाद हुए बवाल को लेकर 25 सितंबर से दो अक्तूबर तक अवकाश घोषित कर दिया गया था। मंगलवार को दस दिन बाद जब विश्वविद्यालय खुला तो परिसर में रौनक दिखी।
बीएचयू में अवकाश के बाद मंगलवार को चहल-पहल दिखी। करीब दस दिन की छुट्टी के बाद हॉस्टल से लेकर संकायों तक छात्र-छात्राएं और प्राध्यापक आते-जाते दिखते रहे। सब कुछ सामान्य रहा।
किसी तरह का कोई विरोध, धरना-प्रदर्शन नहीं हुआ। मंगलवार को परिसर में केवल विश्वविद्यालय के ही सुरक्षाकर्मी रहे। बाहर से आई पुलिस को परिसर से हटा दिया गया है।
पुलिसकर्मी केवल मुख्य द्वार सहित बीएचयू में प्रवेश के अन्य द्वारों और आसपास तैनात रहे। इसके अलावा बीएचयू में बवाल मामले की न्यायिक जांच करने आई समिति के सामने एलडी गेस्ट हाउस पहुंचकर करीब दर्जनभर छात्र-छात्राओं ने अपने बयान दर्ज कराए।
मंगलवार सुबह विश्वविद्यालय खुला और कक्षाएं चलनी शुरू हुईं तो विभिन्न संकायों से लेकर विश्वनाथ मंदिर तक सामान्य दिनों की तरह छात्र-छात्राओं की भीड़ और चहल-पहल दिखी।
इधर, मंगलवार को विवि में पहली बार सात महिला सुरक्षाकर्मियों की तैनाती भी की गई। जल्द ही उनकी वर्दी भी आने की बात कही जा रही है। चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह अपनी टीम के साथ हॉस्टल और संकायों में जाकर सुरक्षा का जायजा लेती रहीं।
शाम तक परिसर के प्रमुख चौराहों, हॉस्टलों का दौरा कर उन्होंने तमाम छात्र-छात्राओं से बातचीत की। बताया कि छात्राओं को चीफ प्रॉक्टर कार्यालय की ईमेल आईडी, हेल्पलाइन नंबर आदि की जानकारी दी जा चुकी है।
इस पर आने वाली शिकायतों का तत्काल निस्तारण किया जाएगा। उधर हाईकोर्ट के रिटायर जज जस्टिस वीके दीक्षित के सामने एलडी गेस्ट हाउस में दर्जन भर छात्र पहुंचे और अपने बयान दर्ज कराए। सूत्रों की मानें तो इन छात्र-छात्राओं ने घटना के लिए विश्वविद्यालय को दोषी करार दिया है।