एक अधिवक्ता ने आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी की मौत के बावजूद कृष्णा सुपर स्पेशलिटी हास्पिटल हैरिसगंज में बिल बढ़ाने के लिए उन्हें जिंदा बताकर रखा गया और बाद में पीजीआई लखनऊ रेफर कर दिया गया।
बाद में डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया तो पता चला कि उनकी मौत रेफर करने से करीब 12 घंटे पहले हो चुकी थी। हालांकि मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसा संभव नहीं।
कोई भी डॉक्टर किसी शव को 12 घंटे तक रखकर इलाज का झूठ नहीं बोल सकता। कई बार हार्ट और ब्लड प्रेशर मिलता रहता है और डॉक्टर जूझते रहते हैं कि शायद मरीज बच जाए। इसके अलावा पोस्टमार्टम में बताए जाने वाले मौत के समय में 6-7 घंटे का हेर-फेर भी हो सकता है।
इसलिए आरोप में दम नहीं लगता। एडवोकेट सुनील कुमार राठौर ने एडीएम सिटी अविनाश सिंह से शिकायत की है कि उन्होंने अपनी पत्नी ममता राठौर को 18 मार्च को कृष्णा सुपर स्पेशलिटी हास्पिटल हैरिसगंज में डॉ. भानुप्रताप राठौर की देखरेख में भर्ती कराया था।
इस दौरान बिल को लेकर कैश काउंटर पर बैठने वाले दीपेंद्र से विवाद हुआ था। 28 मार्च को डॉ. पूनम ने खाने की नली लगाई तो पत्नी को उल्टियां शुरू हो गई। इसके बाद डॉक्टर उसे आईसीयू में ले गईं।
29 मार्च को दोपहर 3:20 बजे अस्पताल ने पीजीआई लखनऊ के लिए रेफर कर दिया। वहां वेंटीलेटर खाली न होने पर केजीएमसी ट्रामा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया गया। वहां बताया गया कि पत्नी की मौत काफी पहले हो चुकी है।