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Republic Day 2024: इस बार राजपथ पर दिखेगी बस्तर के मुरिया दरबार की झलक, सीएम साय ने टीम को कहा- ऑल द बेस्ट

Sat, 13 Jan 2024 06:07 PM IST
ललित कुमार सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर

सार

Republic Day 2024: Bastar's Muria Darbar Tableau: नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस की तैयारी जोरों पर चल रही है। राजपथ पर देशभर के अलग-अलग राज्यों की झांकी परेड में शामिल होगी। इस साल राजपथ के कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ के बस्तर की आदिम जनसंसद मुरिया दरबार पर केंद्रित झांकी दिखेगी।
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टीम की बालिकाओं से चर्चा करते सीएम सीएम विष्णुदेव साय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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Republic Day 2024: Bastar's Muria Darbar Tableau: नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस की तैयारी जोरों पर चल रही है। राजपथ पर देशभर के अलग-अलग राज्यों की झांकी परेड में शामिल होगी। इस साल राजपथ के कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ के बस्तर की आदिम जनसंसद मुरिया दरबार पर केंद्रित झांकी दिखेगी। छत्तीसगढ़ी जनजातीय कला एवं संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। सीएम विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ की झांकी बस्तर की प्राचीन जनसंसद मुरिया दरबार को प्रदर्शित करने आज शनिवार को नई दिल्ली के रवाना हुई बालिकाओं की टीम से चर्चा की। सीएम ने सबको शुभकानाएं देते हुए कहा कि सबके लिए यह बड़े सौभाग्य का विषय है कि गणतंत्र दिवस पर छत्तीसगढ़ की झांकी दिल्ली के कर्तव्य पथ में प्रदर्शित की जा रही है। 

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उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ से इस बार मुरिया दरबार पर केंद्रित झांकी के लिए आप सभी दिल्ली जा रहे हैं। आप सभी को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं। दिल्ली के लिए अपनी ट्रेन पकड़ने के लिए दुर्ग रेलवे स्टेशन पे मौजूद इन बालिकाओं से वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत की। साय ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस परेड के अवसर पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें। उन्होंने बालिकाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियों ने हमेशा प्रदेश का नाम ऊंचा किया है। आज एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन का मौका मिला है। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस परेड पर पूरे विश्व की दृष्टि हमारे भारतवर्ष पर रहती है। 

सीएम ने कहा कि यह एक ऐसा अवसर होता है जहां देशभर की कला संस्कृति से अवगत होने का मौका मिलता है और इन सब बालिकाओं को छत्तीसगढ़ की महान और प्राचीन आदिवासी भारतीय संस्कृति को निरूपित करने का मौक़ा मिला है। सीएम ने समूह की बालिकाओं से अनौपचारिक चर्चा करते हुए उनके नाम व उनकी भूमिका के बारे में भी पूछा। अपने बीच,अप्रत्याशित रूप से और यात्रा के ठीक पहले, मुख्यमंत्री को पाकर अत्यंत उत्साह में दिखीं और झांकी में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का निश्चय दिखाया। दुर्ग स्टेशन से दिल्ली रवाना हो रही बालिकाओं की टीम ने मुख्यमंत्री से कहा कि वे सभी अपनी प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाएंगे।
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थीम भारत लोकतंत्र की जननी पर आधारित 
जनसंपर्क विभाग के आयुक्त मयंक श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया कि इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर छत्तीसगढ़ राज्य की झांकी भारत सरकार की ओर प्रदत्त थीम भारत लोकतंत्र की जननी पर आधारित है। छत्तीसगढ़ की झांकी बस्तर की आदिम जनसंसद मुरिया दरबार जनजातीय समाज में आदि-काल से उपस्थित लोकतांत्रिक चेतना और परंपराओं को दर्शाती है, जो आजादी के 75 साल बाद भी राज्य के बस्तर संभाग में जीवंत और प्रचलित है। देश के 28 राज्यों के बीच कड़ी प्रतियोगिता के बाद छत्तीसगढ़ की झांकी बस्तर की आदिम जनसंसद मुरिया दरबार को इस साल नई दिल्ली में होने वाली गणतंत्र-दिवस परेड के लिए चयनित किया गया है। 

कड़ी स्पर्था में 28 में से 16 राज्यों का चयन 
नई-दिल्ली स्थित कर्तव्यपथ पर होने वाली परेड के लिए 28 में से 16 राज्यों का चयन किया गया है। झांकी का अनूठा विषय और डिजाइन रक्षा मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति को रिझाने में कामयाब रहा। इस झांकी में केंद्रीय विषय आदिम जन-संसद के अंतर्गत जगदलपुर के मुरिया दरबार और लिमऊ-राजा को दर्शाया गया है। झांकी भारत में लोकतंत्र के जन्म और विकास की कहानी सप्रमाण प्रस्तुत करती है। झांकी का सामने का हिस्सा दर्शा रहा है कि बस्तर का जनजातीय समाज आदिकाल से लेकर अब तक स्त्री प्रधान रहा है। अपनी पारंपरिक वेशभूषा में एक स्त्री को अपनी बात रखते हुए दर्शाया गया है। मध्य भाग में बस्तर की आदिम जनसंसद को दर्शाया गया है, जिसे मुरिया दरबार के नाम से जाना जाता है। 

जानें क्या होता है मूरिया दरबार
मुरिया दरबार बस्तर दशहरे का एक सार्थक प्रजातांत्रिक और सर्वमान्य आकर्षण है। झांकी के पीछे के हिस्से में बस्तर की प्राचीन राजधानी बड़े डोंगर में स्थित लिमऊ राजा नाम के स्थान को दर्शाया गया है। लोककथाओं के मुताबिक आदि काल में जब कोई भी राजा नहीं था, तब जनजातीय समाज एक नीबू को पत्थर के प्राकृतिक सिंहासन पर रखकर आपस में ही निर्णय ले लिया करता था। झांकी की सजावट जनजातीय समाज की शिल्प-परंपरा के ‘‘बेलमेटल और टेराकोटा शिल्पों‘‘ से की गई है। बेलमेटल शिल्प का नंदी सामाजिक आत्मविश्वास और सांस्कृतिक सौंदर्य का प्रतीक है। टेराकोटा शिल्प का हाथी लोक की सत्ता का प्रतीक है।

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