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खबर का असर: बदबूदार पानी पी रहे थे ग्रामीण, सूचना मिलते ही हैंडपंप ठीक करने पहुंची टीम; अब कर रहे ये मांग

Tue, 30 May 2023 07:33 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, कांकेर

सार

झिरिया का गंदा बदबूदार पानी ग्राणीणों को अब नहीं पीना होगा।  ग्रामीणों ने एक और हैंड पम्प की मांग की है। जल्द ही यह भी लग जाएगा।
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हैंड पंप से निकलता पानी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ग्रामीण कई महीनों से झिरिया का गंदा बदबूदार पानी पीने को मजबूर थे। अमर उजाला ने प्रमुखता से खबर दिखाई थी। जिसका असर हुआ है। खबर लगने के बाद दूसरे ही दिन सुबह प्रशासन की टीम पहुंची और नल को ठीक किया। अब ग्रामीणों को साफ पीने का पानी मिल पायेगा। ग्रामीणों ने एक और हैंड पम्प की मांग की है। जल्द ही ग्रामीणों के लिए एक और नल की भी व्यवस्था की जाएगी। 

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बिगड़े हैडपम्प को ठीक करने के बाद PHE विभाग ने एक कोरे कागज में पंचनामा भी तैयार किया है। पंचनामा में लिखा गया कि बिगड़े हैंडपंप को आज PHE विभाग द्वारा चालू कर दिया गया है। यही नहीं इस पंचनामे में ग्रामीणों के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान भी लिए गए है। पखांजूर में एक फूड इंस्पेक्टर ने अपना मोबाइल पानी से निकालने के लिए लाखों लीटर पानी बहा दिया। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और फूड इंस्पेक्टर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया। 

लेकिन इतने पर भी फूड इंस्पेक्टर की हेकड़ी नहीं गई और सोशल मीडिया में सामने आकर पानी बाहर निकालने की बात पर सफाई देने लगे। लेकिन जनाब को ये नहीं पता था कि पिकनिक मनाने के मूड में तो उन्होंने पहले अपना मोबाइल पानी में गिराया, इसके बाद परलकोट जलाशय के स्पिलवे टैंक के रिजर्व पानी को बहा दिया। आपको जानकर हैरानी होगी कि परलकोट जलाशय से महज एक किलोमीटर दूर आज भी गांव वाले प्राकृतिक स्त्रोतों से अपनी प्यास बुझा रहे हैं।

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जानें क्या था मामला
कोयलीबेड़ा ब्लॉक के बोगानभोड़िया गांव में लगभग 30 परिवार रहते हैं। इस गांव में सिर्फ एक नल का कनेक्शन है। जो पिछले 4 महीने से खराब है। नल में पानी नहीं आने के कारण ग्रामीण जंगलों के बीच मौजूद झिरिया से पीने का पानी इकट्ठा करके पीते हैं। ये पानी इतना गंदा है कि जानवर भी बड़ी मुश्किल से इसे पीते हैं। लेकिन गांव वालों के पास इसके सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।
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