कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी।
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छत्तीसगढ़ के बीजापुर में विधायक विक्रम मंडावी के काफिले पर हुए हमले को लेकर नक्सलियों ने सफाई पेश की है। नक्सलियों की पश्चिम बस्तर डिवीजनल कमेटी की ओर से पर्चे जारी किए गए हैं। इनमें कहा गया है कि विधायक को टारगेट करके हमला नहीं किया गया था। यह हमला जनवरी से शुरू हुए टीसीओसी का हिस्सा था। करीब पांच दिन पहले नक्सलियों ने कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी के काफिले पर हमला किया था। वह नुक्कड़ सभा कर लौट रहे थे, तभी उनके काफिले निशाना बनाकर फायरिंग की गई थी।
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डिविजनल कमेटी के सचिव और प्रवक्ता मोहन ने स्पष्ट किया है कि काफिले में शामिल किसी भी राजनेता को टारगेट कर गोली नहीं चलाई गई थी। उसने पर्चे में कहा है कि बस्तर में लगातार बर्बर कार्रवाई की जा रही है। अब तो हवाई हमले भी हो रहे हैं। पिछले तीन सालों में फोर्स ने तीन बार एयर स्ट्राइक की है। केंद्रीय सुरक्षा बल, डीआरजी, राज्य की पुलिस लगातार हमला कर रही है। इन्हीं कार्रवाईयों के विरोध में दंडकारण्य क्षेत्र में टीसीओसी चलाई जा रही है। इसी के तहत बीजापुर में हमला किया गया था।
जिला पंचायत सदस्य की गाड़ी में लगी थी गोली
बीजापुर विधायक और बस्तर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विक्रम मंडावी पीसीसी के निर्देश पर मंगलवार को नुक्कड़ सभा मे शामिल होने गंगालूर गए थे। यह इलाका नक्सल प्रभावित है। सभा के बाद विधायक विक्रम मंडावी सहित कांग्रेसियों का काफिला लौट रहा था। इसी दौरान पदेडा गांव के नजदीक नक्सलियों ने काफिले में चल रहे वाहनों पर हमला कर दिया। काफिले में शामिल जिला पंचायत सदस्य पार्वती कश्यप के वाहन के पिछले टायर में गोली लगी थी।
चार साल पहले हुई थी भाजपा विधायक की हत्या
करीब चार साल पहले लोकसभा चुनाव के समय साल 2019 में भी नक्सलियों ने ऐसे ही दंतेवाड़ा से विधायक भीमा मंडावी के काफिले पर हमला किया था। इस हमले में मौके पर ही विधायक भीमा मंडावी की हत्या कर दी गई थी। वहीं बीजापुर में भी भाजपा के पूर्व वन मंत्री और विधायक रहे महेश गागड़ा के काफिले पर भी नक्सली हमला कर चुके हैं। इसी तरह 25 मई 2013 को हुए झीरम घाटी नक्सली हमले में कांग्रेस तत्कालीन अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल सहित 32 लोगों की जान गई थी।