कांग्रेस प्रत्याशी डॉ के के ध्रुव
- फोटो : अमर उजाला
सन 2000 में मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ अस्तित्व में आया। प्रदेश के मुखिया बने स्व. अजीत प्रमोद जोगी तब यहां से विधायक थे भाजपा से रामदयाल उइके ने 2003 में यह सीट कांग्रेस के अजीत प्रमोद जोगी के लिए खाली की जहां पर उपचुनाव में उन्होंने भाजपा के नंदकुमार साय को रिकार्ड 54150 वोटो से करारी हार दी थी।
भाजपा से प्रत्याशी प्रणव मरपच्ची
- फोटो : अमर उजाला
मरवाही विधानसभा क्षेत्र की सबसे बड़ी मांग जिला बनाए जाने की थी जिसे प्रदेश की भूपेश सरकार ने पूरी कर दी। 2018 में कांग्रेस की सरकार बनी है मरवाही से विधायक स्व. अजीत जोगी बने और प्रदेश की भूपेश सरकार ने क्षेत्रवासियों को प्रदेश के 28वें जिले के रूप में सौगात दी हालांकि उसके बाद अजीत जोगी का निधन हो गया और 2020 में इस मरवाही विधानसभा सीट में उपचुनाव हुआ और इस चुनाव में जोगी कांग्रेस से कोई भी प्रत्याशी मैदान में नहीं उतरा और चुनाव में कांग्रेस के डॉ के के धुव्र ने भाजपा के डॉ गंभीर सिंह को 38 हजार 132 वोटों से पराजित किया। कांग्रेस और भाजपा दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशी पेशे से डॉक्टर रहे। दो डॉक्टरों के बीच मरवाही विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस के डॉ. केके ध्रुव ने भाजपा के डॉ. गंभीर सिंह को पराजित किया था।
उपचुनाव में राजनीतिक दलों की स्थिति
मरवाही विधानसभा में 2020 उपचुनाव हुए हालांकि इस चुनाव में जोगी की पार्टी से कोई भी मैदान में नहीं उतरा और इस उपचुनाव में कांग्रेस के डॉ केके धुव्र ने भाजपा प्रत्याशी गंभीर सिंह को 38 हजार 132 वोटों से पराजित किया और कांग्रेस प्रत्याशी को 83 हजार 372 और भाजपा उम्मीदवार को 45 हजार 240 मत मिले थे।
वहीं आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस से जहां वर्तमान विधायक डॉ. केके धुव्र मैदान में हैं तो भाजपा ने डॉ धुव्र के मुकाबले पूर्व सैनिक और पिछले दो बार से सरपंची कर रहे प्रणव कुमार मरपच्ची को मैदान में उतारा है तो अब तक जेसीसीजे की ओर से अपने प्रत्याशी की घोषणा नही की गई है। हालांकि इस बार केके ध्रुव की डगर उतनी आसान नही है क्योंकि इस चुनाव में डॉ के के ध्रुव सहित कांग्रेस पार्टी से 28 दावेदारों ने टिकट के लिए दावेदारी की और डॉ को पैराशूट प्रत्याशी बतलाया था।