आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो के मुताबिक एमजीएम नेत्र संस्थान भवन को एसबीआई बैरन बाजार रायपुर में बंधक रखकर अस्पताल के लिए चिकित्सा उपकरण खरीदने तीन करोड़ रूपये का टर्म लोन तथा 10 लाख रूपये का कैश क्रेडिट लोन ट्रस्ट द्वारा लिया गया था। 13 सितंबर 2004 को लोन लेने के उपरांत अल्प अवधि में अप्रैल 2005 में ट्रस्ट का लोन एकाउण्ट अनियमित हो गया।
लोन की प्रक्रिया में मुकेश गुप्ता आईपीएस का बिना किसी अधिकार के बैंक में हस्तक्षेप किया गया। बंधक भवन एमजीएम नेत्र चिकित्सालय का बैंक अधिकारियों को निरीक्षण कराया गया। बैंक के अभिलेख में मुकेश गुप्ता का नाम ट्रस्ट का मेन ड्राईविंग फोर्स एवं ट्रस्ट के संचालन के मुख्य कर्ता-धर्ता के रूप में उल्लेखित है।
प्रभावशाली पुलिस अधिकारी और शासकीय सेवा में रहते हुए मुकेश गुप्ता द्वारा ट्रस्ट का लोन एकाउण्ट अनियमित एवं एनपीए होने पर 13 सितंबर 2006 से कई बार बैंक के अधिकारियों को आश्वस्त कराते रहे कि ट्रस्ट की आर्थिक स्थिति शीघ्र सुधर जाएगी और लोन एकाउण्ट नियमित होकर कर्ज अदायगी की जावेगी।
बैंक को न तो समय पर लोन की राशि का ब्याज मिल पा रहा था और न ही लोन की किस्त अदा की जा रही थी। आपको बता दें पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के नज़दीकी माने जाने वाले गुप्ता पर फोन टैपिंग के आरोप भी लग चुके हैं। रमन सिंह सरकार के दौरान गुप्ता एंटी करप्शन ब्यूरो और इंटलिजेंस विभाग में कई अहम पदों पर काम कर चुके हैं। गौरतलब है कि पिछले साल छत्तीसगढ़ पीडीएस घोटाले में भी गुप्ता का नाम आ चुका है।