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Ambikapur: धान काटकर लौट रही महिला को हाथी ने कुचला, पति ने भागकर बचाई जान, ग्रामीणों में दहशत

Fri, 25 Nov 2022 06:54 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुर

सार

गुरूवार दोपहर धान काटने गई थी। देर शाम वह खेत से लौट रही थी। वह कोरवापारा स्कूल के पास पहुंची थी, जहां अचानकर दंतैल हाथी उसके सामने आ गया। हाथी को देखकर वह हड़बड़ा गई। जब तक महिला भाग पाती, दंतैल हाथी उसके पास पहुच गया और उसे  उठाकर नीचे पटक दिया जिससे महिला की मौके पर मौत हो गई।  
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महिला को हाथी ने कुचला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सरगुजा जिले के लुड्रा वनपरिक्षेत्र के तहत ग्राम रिरि में बीती शाम धान काटकर खेत से लौट रही महिला को दंतैल हाथी ने कुचलकर मार डाला। महिला के पीछे आ रहे ग्रामीण ने भागकर अपनी जान बचाई। दंतैल हाथी अपने दल से बिछड़कर ग्राम पंचायत पसेना के जंगल पहुंच गया था। वनविभाग के साथ ही अधिकांश ग्रामीणों को हाथी की मौजूदगी की जानकारी नहीं थी। उक्त दंतैल हाथी अब भी पास के जंगल में डटा हुआ है। वनविभाग ने आज महिला के शव का पोस्टमार्टम कराया और परिजनां को सौंप दिया।

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लुंड्रा रेंजर आकांक्षा लकड़ा ने बताया कि ग्राम पंचायत पसेना अंतर्गत रिरि निवासी कलकली बाई पति देवाधि 58 वर्ष गुरूवार दोपहर धान काटने गई थी। देर शाम वह खेत से लौट रही थी। वह कोरवापारा स्कूल के पास पहुंची थी, जहां अचानकर दंतैल हाथी उसके सामने आ गया। हाथी को देखकर वह हड़बड़ा गई। जब तक महिला भाग पाती, दंतैल हाथी उसके पास पहुच गया और उसे  उठाकर नीचे पटक दिया जिससे महिला की मौके पर मौत हो गई।  महिला से कुछ दूर पर उसका पति भी था, जिसने भागकर जान बचाई। महिला को मारने के बाद दंतैल हाथी पास के जंगल में चला गया। वनविभाग ने शुक्रवार को महिला के शव का पोस्टमार्टम कराया और शव परिजनों को सौंप दिया गया है। 

 

हाथी की मौजूदगी से दहशत में लोग 
ग्रामीणों ने बताया कि महिला को मारने वाला हाथी दल से बिछड़कर पसेना के जंगल पहुंचा था। ग्रामीणों ने बताया कि उक्त हाथी सुबह से पसेना के जंगल में पहुंचा हुआ था। कुछ ग्रामीणों ने हाथी को देखा था एवं सूचना अन्य ग्रामीणों को देते हुए जंगल न जाने के लिए कहा था। जंगल से हाथी कोरवापारा स्कूल के पास पहुंच गया था। इसकी जानकारी ग्रामीणों को नहीं थी, जिसके कारण महिला उसके पास पहुंच गई। हाथी अब भी पास के जंगल में डटा हुआ है, इससे लोग दहशत में हैं। हाथी अपने पुराने पथ पर ही विचरण करते हैं। रिरि का क्षेत्र हाथियों का विचरण क्षेत्र रहा है।

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