शिवनाथ तट पर बसे शहर भिलाई-दुर्ग में बुरी तरह से प्रदूषण फैला है। हालात यह हैं कि पर्यावरण वैज्ञानिक इसे रहने के योग्य नहीं मानते। 2005 के बाद से यहां की जलवायु पूरी तरह बदल चुकी है और प्रदूषण ढाई गुना बढ़ा है। कोयले से जुड़े बिजनेस की वजह से यहां की हवा जहर बन चुकी है।
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पं. रविशंकर विश्वविद्यालय का रसायन और पर्यावरण विज्ञान विभाग राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंप चुका है। अगर पर्यावरण को सुरक्षित बनाये रखने के लिए उपाय नहीं किये गए तो यह स्थिति और बिगड़ जाएगी। वैज्ञानिकों के मुताबिक भिलाई-दुर्ग के वायुमंडल और धूल में 60 प्रतिशत कार्बन है। जिसमें केवल कोयले की वजह से ही 10 फीसदी कार्बन है।
2005 तक यहां प्रदूषण का स्तर पीएम 2.5 यानी 80 से 100 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर था, जोकि 2017 में बढ़कर 200 से 250 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर हो गया है। यानि 12 साल में भिलाई-दुर्ग का प्रदूषण ढाई गुना बढ़ा है।
आपको बता दें कि यहां सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लंघन किया जा रहा है। गाइडलाइन के मुताबिक जहां कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा हो, उसके चारों तरफ ग्रीन मैट लगाना जरूरी है। लेकिन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा।
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पंड़ित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के केमेस्ट्री डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. शम्स परवेज ने कहा कि भिलाई की स्थिति डरावनी है। पिछले एक दशक में यहां के प्रदूषण में ढाई गुना इजाफा हुआ है। वायुमंडल में कार्बन की मात्रा 60 फीसदी बढ़ी है।