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गोबर से बिजली तैयार करेगा छत्तीसगढ़: महिलाएं बनाएंगी और राज्य सरकार उसे खरीदेगी

Mon, 04 Oct 2021 08:01 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गोबर से विद्युत उत्पादन की परियोजना के प्रथम चरण में बेमेतरा जिले के राखी, दुर्ग के सिकोला और रायपुर जिले के बनचरौदा में गोबर से विद्युत उत्पादन की यूनिट लगाई गई है। एक यूनिट से 85 क्यूबिक घन मीटर गैस बनेगी। चूंकि एक क्यूबिक घन मीटर से 1.8 किलोवाट विद्युत का उत्पादन होता है। इससे एक यूनिट में 153 किलोवाट विद्युत का उत्पादन होगा...
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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल - फोटो : Amar Ujala (File Photo)
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विस्तार
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देश में अब छत्तीसगढ़ गोबर से बिजली बनाने वाला राज्य बनने जा रहा है। राज्य के सीएम भूपेश बघेल ने शनिवार को बेमेतरा जिला मुख्यालय के बेसिक स्कूल ग्राउंड में आयोजित किसान सम्मेलन के दौरान राज्य के गौठानों में गोबर से बिजली उत्पादन की परियोजना का वर्चुअल शुभारंभ किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम सुराज की परिकल्पना को साकार करते हुए गांवों को स्वावलंबी बनाने में जुटी है। अब छत्तीसगढ़ के गांव गोबर से विद्युत उत्पादन के मामले में स्वावलंबी होंगे।

बिजली उत्पादन से मिलेगा दोगुना लाभ

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि एक समय था जब विद्युत उत्पादन का काम सरकार और बड़े उद्योगपति किया करते थे। अब हमारे राज्य में गांव के ग्रामीण टेटकू, बैशाखू, सुखमती, सुकवारा भी बिजली बनाएंगे और बेचेंगे। गोबर खरीदी का मजाक उड़ाने वाले लोग अब इसकी महत्ता को देख लें। मुख्यमंत्री ने बेमेतरा जिले के राखी गौठान, दुर्ग जिले के सिकोला तथा रायपुर जिले के बनचरौदा में गोबर से विद्युत उत्पादन के शुभारंभ अवसर पर वहां मौजूद स्व-सहायता समूह की महिलाओं एवं गौठान समितियों के सदस्यों से उनकी आयमूलक गतिविधियों के बारे में चर्चा करते हुए उन्हें अब गोबर से विद्युत उत्पादन की यूनिट शुरू होने पर बधाई और शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोबर से वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन से जितना लाभ महिला समूहों को हो रहा है। बिजली उत्पादन शुरू होने से उन्हें दोगुना लाभ मिलने लगेगा।

महिलाएं गोबर से बिजली बनाएंगी और बेचेंगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के सभी गौठानों में गोबर की बिजली उत्पादन शुरू किया जाएगा। समूह की महिलाएं गोबर से बिजली बनाएंगी और बेचेंगी। उनकी बिजली सरकार खरीदेगी। गौठानों में स्थापित रूरल इंडस्ट्रियल पार्क में विभिन्न प्रकार के उत्पादों को तैयार करने के लिए लगी मशीनें भी गोबर की बिजली से चलेंगी। गौठान अब बिजली के मामले में स्वावलंबी होंगे। गोबर से सस्ती बिजली उत्पादन होने के साथ-साथ जैविक खाद का भी उत्पादन होगा। इससे गौठान समितियों और महिला स्व-सहायता समूहों को दोहरा लाभ होगा। गौरतलब है कि सुराजी गांव योजना के तहत छत्तीसगढ़ राज्य के लगभग छह हजार गांवों में गौठानों का निर्माण कराकर उन्हें रूरल इंडस्ट्रियल पार्क के रूप में विकसित किया गया है, यहां गोधन न्याय योजना के तहत दो रुपये किलो में गोबर की खरीदी कर बड़े पैमाने पर जैविक खाद का उत्पादन एवं अन्य आयमूलक गतिविधियां समूह की महिलाओं द्वारा संचालित की जा रही है।

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460 किलोवाट विद्युत का उत्पादन

गोबर से विद्युत उत्पादन की परियोजना के प्रथम चरण में बेमेतरा जिले के राखी, दुर्ग के सिकोला और रायपुर जिले के बनचरौदा में गोबर से विद्युत उत्पादन की यूनिट लगाई गई है। एक यूनिट से 85 क्यूबिक घन मीटर गैस बनेगी। चूंकि एक क्यूबिक घन मीटर से 1.8 किलोवाट विद्युत का उत्पादन होता है। इससे एक यूनिट में 153 किलोवाट विद्युत का उत्पादन होगा। इस प्रकार उक्त तीनों गौठानों में स्थापित बायो गैस जेनसेट इकाईयों से लगभग 460 किलोवाट विद्युत का उत्पादन होगा, जिससे गांवों, गौठानों में प्रकाश व्यवस्था के साथ-साथ वहां स्थापित मशीनों का संचालन हो सकेगा। गोबर से विद्युत उत्पादन की यूनिट से बिजली उत्पादन के बाद शेष स्लरी के पानी का उपयोग बाड़ी और चारागाह में सिंचाई के लिए होगा तथा बाकी अवशेष से जैविक खाद तैयार होगी। इस तरह से देखा जाए तो गोबर से पहले विद्युत उत्पादन और उसके बाद शत-प्रतिशत मात्रा में जैविक खाद प्राप्त होगी। इससे गौठान समितियों और महिला समूहों को दोहरा लाभ मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि, छत्तीसगढ़ सरकार की सुराजी गांव योजना के तहत गांवों में 6112 गौठान पूर्ण रूप से निर्मित एवं संचालित है। गौठानों में अब तक 51 लाख क्विंटल से अधिक का गोबर खरीद जा चुका है, जिसके एवज में ग्रामीणों, पशुपालकों को 102 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। गोबर से गौठानों में अब तक 12 लाख क्विंटल से अधिक वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट खाद का उत्पादन एवं विक्रय किया जा चुका है। सुराजी गांव योजना के तहत निर्मित गौठान और गोधन न्याय योजना के कन्वर्जेंस से बहुआयामी लाभ मिलने लगा है। इससे गांवों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल मिला है।
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