PM Shri Swami Atmanand English Medium School: भूपेश सरकार के समय छत्तीसगढ़ में खोले गये स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल में कुछ अहम बदलाव किये जाएंगे। इस परिवर्तन को लेकर प्रदेश की सियासत गरमाई हुई है। दरअसल, प्रदेश की बीजेपी सरकार स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी मीडियम स्कूल के आगे पीएम श्री जोड़ रही है। ताकि नई शिक्षा नीति के तहत इन स्कूलों को केंद्र सरकार से और अधिक आर्थिक मदद मिल सके। इन स्कूलों को और बेहतर और हाईटेक बनाया जाएगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान ने इस पर हरी झंडी दे दी है। बस इसी परिवर्तन को लेकर कांग्रेस बीजेपी पर हमलावर है क्योंकि ये तत्कालीन भूपेश सरकार की बहुप्रतिक्षित योजना थी।
क्यों सुर्खियों में है ये स्कूल
पिछले तीन सालों से छत्तीसगढ़ बोर्ड के 10वीं और 12वीं को रिजल्ट में सरकारी विद्यालय स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यमॉ स्कूलों का शानदार प्रदर्शन रहा है। इन स्कूलों से हर बार बड़ी संख्या में छात्रों ने माशिमं की मेरिट लिस्ट में जगह बनाई है। इस बार के बोर्ड रिजल्ट में इन स्कूलों का दबदबा है। इन स्कूलों को भूपेश सरकार में प्राइवेट स्कूल्स की तर्ज पर विकसित किया गया है। इनके इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव के साथ ही हाईटेक सुविधाओं से लैस कैंपस, शानदार टीचर फैक्लटी समेत कई अत्याधुनिक सुविधायें उपलब्ध हैं। ये स्कूल हिंदी और अंग्रेजी दोनों मीडियम में चल रहे हैं। इन स्कूलों में एडमिशन को लेकर काफी जद्दोजहद की स्थिति रहती है। कई आईएएस ऑफिसर्स के बच्चे भी इन स्कूलों में पढ़ते हैं।
जानें, कौन थे स्वामी आत्मानंद
Swami Atmanand English Medium School: स्वामी आत्मानंद छत्तीसगढ़ के प्रख्यात संत थे। सामाजिक परिवर्तन के लिए उन्होंने अहम योगदान दिये हैं। मानवता की सेवा में उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। युवाओं के मन में ज्ञान की लौ जलाई। करुणा और समाजसेवा के बारे में सिखाया। स्वामी आत्मानंद को बचपन में प्यार से तुलेन्द्र भी कहा जाता था। उनका जन्म 6 अक्टूबर 1929 को रायपुर जिले के बरबंदा गांव में हुआ था। उनके पिता धनीराम वर्मा एक स्कूल शिक्षक थे। माता भाग्यवती देवी एक गृहिणी थीं। आगे चलकर तुलेन्द्र संत बन गये। साल 1960 में चैतन्य ने संन्यास ले लिया और स्वामी आत्मानंद के नाम से प्रसिद्ध हुये। उनके प्रवचनों में भाग लेने वाले लोगों ने दान और आर्थिक योगदान देना शुरू कर दिया ताकि समाजसेवा हो सके। साल 1961 में राज्य सरकार ने उन्हें आश्रम के निर्माण के लिए 93,098 वर्ग फुट जमीन दी। 13 अप्रैल 1962 को इस आश्रम का उद्घाटन हुआ। आज हम रायपुर के जिस खूबसूरत स्वामी विवेकानन्द आश्रम को देखते हैं, वह उनकी कड़ी मेहनत का परिणाम है। स्वामी छत्तीसगढ़ की जनता के प्रति निस्वार्थ भाव से समर्पित रहे। मंदिर निर्माण के लिए उनके पास जो भी धन था, उसे उन्होंने जरूरतमंद लोगों को दे दिया।