कोर कमेटी की बैठक के बाद सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त हो गई है।
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छत्तीसगढ़ में पिछले दस दिनों से चल रही सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों की हड़ताल शुक्रवार को कोर कमेटी की बैठक के बाद समाप्त हो गई है। इससे पहले गुरुवार को अधिकारी और कर्मचारी की हुई बैठक में सहमति नहीं बन पाई थी। 22 अगस्त से दो सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन ने हड़ताल खत्म करने की घोषणा की हैं। उधर, राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी हड़ताल पर बैठे अधिकारी-कर्मचारियों से अपील की थी।
मंत्री की मध्यस्थता के बाद खत्म हुई हड़ताल
छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से मंत्री रविंद्र चौबे हड़ताल पर बैठे अधिकारी और कर्मचारियों से लगातार उनकी मांगों को लेकर बात कर रहे थे। फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा ने बताया कि दिए गए सुझावों को सरकार ने मान लिया है। मंत्री रविंद्र चौबे के बंगले पर हुए समझौते को अधिकारी और कर्मचारियों के सामने रखा गया।
सरकारी विभागों में कामकाज था ठप
सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद विभागों का कार्य पूरी तरह ठप पड़ा हुआ था। इस दौरान दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले लोगों को जिला मुख्यालय से वापस लौटना पड़ रहा था। उन्हें लगातार परेशानियां उठानी पड़ रही थी। वहीं, करीब चार लाख अधिकारी और कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद सरकारी कार्य नहीं हो रहे थे।
अधिकारी-कर्मचारी की यह थी मांग
बीते जुलाई में हड़ताल कर चुके कर्मचारी अन्य राज्यों की तरह 34 प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाने की मांग कर रहे थे। उस दौरान कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 12 प्रतिशत था। जुलाई माह में अधिकारी और कर्मचारियों की तरफ से की गई हड़ताल के बाद सरकार ने महंगाई भत्ता 12 से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया था। अधिकारी-कर्मचारी लगातार भत्ता 34 प्रतिशत करने की मांग मांग कर रहे थे। सरकार की तरफ से ठोस आश्वासन न मिलने पर अधिकारी और कर्मचारी 22 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए थे। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के संरक्षक विजय झा ने बताया कि दिवाली या राज्योत्सव पर कर्मचारियों को इस राशि का भुगतान किया जाएगा। साथ ही उन्हें एरियर भी मिलेगा। जिससे पूरा करने के वादे को लेकर हड़ताल समाप्त की गई है।