आयुष ने बताया कि 3 वर्ष के नियमित अध्ययन में सफलता दिलाई। माता-पिता का भरपूर सहयोग मिला वही गुरुजनों का सतत मार्गदर्शन मिलता रहा जिस कारण मैं नीट की परीक्षा निकाल पाया।
आयुष ने बताया कि 3 वर्ष के नियमित अध्ययन में सफलता दिलाई। माता-पिता का भरपूर सहयोग मिला वही गुरुजनों का सतत मार्गदर्शन मिलता रहा जिस कारण मैं नीट की परीक्षा निकाल पाया। आयुष ने बताया कि माता-पिता की प्रेरणा से एवं गुरुजनों के मार्गदर्शन में कक्षा दसवीं के बाद में नीट की परीक्षा की तैयारी प्रारंभ कर दी थी।
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बिना कोचिंग किए निकाली नीट की परीक्षा
एक ओर रामानुजगंज से बड़ी संख्या में 12वीं करने के बाद बच्चे नीट की परीक्षा की तैयारी करने कोटा जा रहे हैं वही आयुष ने रामानुजगंज में रहकर एवं रामानुजगंज के ही शासकीय स्कूल में पढ़ाई करके नीट परीक्षा निकाल कर एक मिसाल पेश की।
मोबाइल का किया सदुपयोग
आजकल के बच्चे जहां मोबाइल में गेम खेलना एवं अनर्गल चीज देखकर समय व्यतीत करते हैं वहीं आयुष ने मोबाइल का सहारा लेकर आगे बढ़ने की ठानी। आयुष को पक्का विश्वास था कि जो पढ़ाई में बाहर जाकर करूंगा वहीं पढ़ाई मैं घर में भी रहकर कर सकता हूं। आयुष के दृढ़ निश्चय एवं विश्वास ने उसे सफलता दिलाई।