चंडीगढ़। कोरोना काल के बाद युवाओं को बजट का बेसब्री से इंतजार था। उन्होंने कहा कि उम्मीद थी कि इस बार कोरोना से उभरने के लिए नए रोजगार के अवसर खुलेंगे और शिक्षा के क्षेत्र में महंगाई कम होगी। लेकिन बजट देखने के बाद ऐसा कुछ भी नजर नहीं आया। केंद्र सरकार इस सेशन से नई शिक्षा नीति को लागू करने जा रही है। बजट में स्किल डेवलपमेंट, ऑनलाइन लर्निंग में विद्यार्थियों का जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई के लिए नए संसाधनों, सस्ती शिक्षा प्रणाली आदि पर खर्च करने की जरूरत थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
क्या कहते हैं युवा
कोट्स
मोबाइल महंगे हो गए.. ऑनलाइन शिक्षा पर पड़ेगा असर
कोरोना के बाद उपजे हालातों के बाद इस बार के बजट से राहत की काफी उम्मीद थी। सरकार खुद डिजिटल इंडिया को बढ़ावा दे रही है, दूसरी तरह मोबाइल और उसके पार्ट्स में महंगा कर दिया है। इसका सीधा असर वर्तमान में चल रही ऑनलाइन शिक्षा पर भी पड़ेगा। शिक्षा के क्षेत्र में बजट में पहले के मुकाबले कोई बदलाव देखने को नहीं मिला। - राहुल कुमार
नई शिक्षा नीति पर ध्यान नहीं किया केंद्रित
सरकार शुरुआत से नई शिक्षा नीति को बढ़ावा देने पर जोर दे रही थी। इस सेशन से शिक्षा नीति को लागू भी किया जा रहा है। उसे देखते हुए शिक्षा के बजट में कोई बदलाव नहीं हुए। लगभग एक साल के बाद स्कूल खुल रहे हैं, विद्यार्थियों पर मानसिक तनाव काफी बढ़ा है। सरकार को विद्यार्थियों के लिए नई नीतियां और डिजिटल उपकरणों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए था। - धीरू
शिक्षा को नहीं मिली प्राथमिकता
इस वर्ष नई शिक्षा नीति के चलते सरकार की प्राथमिकता शिक्षा होनी चाहिए थी, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में बजट निराश करने वाला ही रहा है। पहले ही शिक्षा के क्षेत्र में निजीकरण होने के कारण वह आम आदमी के क्षेत्र से बाहर होती जा रही है। मध्यम वर्गीय परिवार के लिए उच्च शिक्षा के लिए लाखों रुपए फीस देना बहुत मुश्किल होता है। - सुखदेव
युवाओं के रोजगार को लेकर कोई घोषणा नहीं
कोरोना महामारी के बाद बड़ी संख्या में युवा वर्ग को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है। इस बजट से राहत की उम्मीद थी, लेकिन युवा वर्ग के रोजगार को लेकर इस बजट में कुछ नहीं है। कई पुरानी घोषणाओं को इस बजट में एक बार फिर दोहराने का काम किया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में भी कोई नई बदलाव योग्य घोषणाएं नहीं की गई। - रवि
यूजीसी के बजट में बढ़ोतरी होनी चाहिए थी
पिछले कई वर्षों में यूजीसी के बजट में कटौती की जा रही है। इसका सीधा असर उच्च शिक्षा पर पड़ रहा है। इस बार उम्मीद थी कि इसमें कुछ बढ़ोतरी होगी, लेकिन बजट में इसका कोई जिक्र नहीं हुआ। नौकरी की बात करें तो निजीकरण के क्षेत्र में बात की गई है, जिसका सीधे तौर पर कोई फायदा देखने को नहीं मिलता। लेकिन चिकित्सा के क्षेत्र में काफी उत्साहजनक बजट रहा है। - निखिल
युवाओं की बजाय चुनाव पर अधिक ध्यान
कोरोना काल में पैदा हुई बेरोजगारी के बाद युवाओं को इस बजट से काफी आस थी। लेकिन सरकार ने चुनावी राज्यों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया है। युवाओं के रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में नयापन और बदलाव पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। - रजत नैन