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अपनी बिल्डिंग सुरक्षित नहीं, दूसरों को आग से बचाव की नसीहत

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चंडीगढ़। प्रशासन की ओर से बनाए गए नए सामुदायिक केंद्रों का कब्जा लेने से नगर निगम इसलिए इन्कार कर रहा है क्योंकि इनके पास अभी फायर संबंधी अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं है। अब खास बात यह है नगर निगम के खुद भवन के पास आग से बचाव संबंधी अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं है। बिल्डिंग के अपग्रेडेशन का हवाला देने वाले अधिकारियों ने खुद एक साल पहले उसके सौंदर्यीकरण के उद्घाटन कार्यक्रम में लड्डू खाया था लेकिन फायर सेफ्टी के लिए आवेदन करना भूल गए।
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आम आदमी की पार्षद तरुणा मेहता ने सदन की बैठक में सामुदायिक केंद्र में बुकिंग की अनुमति की बात कही तो आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने उन्हें बताया कि प्रशासन ने सामुदायिक केंद्र में फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं लगाए हैं। प्रशासन जब अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए फायर ब्रिगेड विभाग के पास आवेदन करेगा उसके बाद टीम चेक करने के बाद अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी कर देगी। उसके बाद नगर निगम उस सामुदायिक केंद्र को अपने कब्जे में लेगा।
फायर ब्रिगेड विभाग निगम के अंतर्गत ही आता है। चीफ फायर ऑफिसर भी निगम की बिल्डिंग में ही बैठते हैं। यहां प्रतिदिन हजारों लोग काम करने और अपने कार्यों के लिए आते हैं। इसके बावजूद अभी तक निगम की बिल्डिंग में आग से बचाव संबंधी अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं लिया गया है।
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निगम पहले भी खुद को जारी कर चुका है नोटिस
नगर निगम में पहले तीन तल की मरम्मत का कार्य काफी समय पहले ही हो गया था। उस दौरान फायर फाइटिंग सिस्टम लगाया गया था लेकिन नीचे के तल की मरम्मत का कार्य नहीं किया गया था। इस कारण ऊपर के तलों पर पानी पहुंचाने के लिए पाइप ही नहीं थे। इस दौरान फायर ब्रिगेड विभाग ने निगम को नोटिस जारी कर अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने को भी कहा था। एक साल बीतने के बाद भी किसी ने इसके लिए आवेदन तक नहीं किया।
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स्मार्ट सिटी की बिल्डिंग का भी यही हाल
सेक्टर-17 में बनी स्मार्ट सिटी की बिल्डिंग का भी यही हाल है। वहां भी आग लगी तो बचाव के लिए कोई आपातकालीन गेट मे नहीं है। इससे पहले स्मार्ट सिटी के जीएम एनपी शर्मा ने एक वैकल्पिक व्यवस्था जरूर की थी जिसमें आपातकाल के समय स्लाइडर से स्मार्ट सिटी की बिल्डिंग की छत से नीचे आ सकते थे लेकिन यह ट्रायल तक ही सीमित रहा।
कोट-
सामुदायिक केंद्र का उद्घाटन होने के बाद लोग बुकिंग के लिए संपर्क केंद्र जा रहे हैं तो वहां बुकिंग के लिए केंद्र का नाम ही नहीं है। लोग मेरे पास आते हैं। उद्घाटन होने का मतलब तो यही है कि लोगों के लिए भवन तैयार है। दो विभागों के चक्कर में लोग परेशान हो रहे हैं।
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- तरुणा मेहता, पार्षद
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