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कविता दलालः बंदिश की जंजीरें तोड़ीं और सलवार-सूट पहन डब्ल्यूडब्ल्यूई के रिंग में धाक जमाई

Fri, 18 Jan 2019 03:08 PM IST
खुशबू गोयल संजीव पंगोत्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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कविता दलाल
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डब्ल्यूडब्ल्यूई के रिंग पर वो जब सलवार-सूट पहनकर भारतीय महिला पहलवान विदेशी पहलवानों को पटकनी देती है तो वहां उपस्थित हर कोई उनका दीवाना हो जाता है। भारतीय पहनावे में वे हर किसी की पसंद और चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हम बात कर रहे हैं कविता देवी की, जोकि डब्ल्यूडब्ल्यूई के रिंग में अपना जलवा बिखेर रही हैं। वीरवार को वे चंडीगढ़ में डब्ल्यूडब्ल्यूई टैलेंट डेवलपमेंट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष कैनियन सेमन के साथ पहुंचीं। भारत में पहली बार डब्ल्यूडब्ल्यूई टैलेंट ट्राइआउट के लिए कविता देवी और कैनियन सेमन इन दिनों युवा सुपरस्टार्स की तलाश कर रहे हैं।
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टैलेंट ट्राइआउट भारत में पहले हरियाणा में और उसके बाद चंडीगढ़ के पास हो रहा है। कैनियन सेमन ने बताया कि डब्ल्यूडब्ल्यूई सुपरस्टार्स की अगली पीढ़ी की तलाश में भारत आए हैं। भारत से उन्हें कविता देवी जैसी सुपरस्टार मिल चुकी हैं। अब इनके जैसी और महिलाओं को डब्ल्यूडब्ल्यूई से जोड़ना चाहते हैं। भारत की महिलाएं अब इस फील्ड में काफी आगे आ रही हैं। हाल ही में रोहतक में हुए ट्राइआउट के दौरान 5-6 महिलाओं ने इस खेल से जुड़ने की इच्छा जताई है। डब्ल्यूडब्ल्यूई में पिछले सालों से भारतीय पहलवानों की भागीदारी बढ़ती जा रही है। यहां के पहलवान लगातार अपना रुतबा बढ़ाते जा रहे हैं। द ग्रेट खली इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं।

लोगों की सोच तोड़कर आगे आई
मूल रूप से हरियाणा के जींद जिले की रहने वाली कविता देवी ने बताया कि  वह पहले वेटलिफ्टिंग करती थीं। इसके बाद पहलवानी करने की सोची, लेकिन लोगों की सोच आड़े आती थी। रिश्तेदार और जानने वाले हक में नहीं थे कि लड़की लड़कों के मुकाबले पहलवानी करे। मुझे बहुत बार रोका गया। आखिर मैंने ठान लिया कि मुझे लोगों की सोच को तोड़ना है। मैंने दुबई में ट्राइआउट में हिस्सा लिया और मेरा चुनाव हो गया। आज विदेशों में जाकर खेल रही हूं। आज मुझे एक और मौका मिला है कि अपने जैसी और लड़कियों को इस तरह का मंच प्रदान कर सकूं।
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सलवार सूट पहनकर फाइट करने वाली एकमात्र पहलवान
कविता ने बताया जब वह डब्ल्यूडब्ल्यूई के रिंग में सलवार-सूट पहनकर पहुंचती हैं तो हर कोई हैरान होकर देखता है। मुझे गर्वहोता है कि मैं एकमात्र ऐसी पहलवान हूं जोकि अमेरिका में सलवार-सूट पहनकर फाइट करती हूं। इस पहनावे के चलते रिंग के आसपास बैठे दर्शक मुझे देखते ही इंडियन गर्ल के नाम से अब पुकारने लगे हैं।

ग्रेट खली की फैन
कविता देवी ने बताया कि जब मुझे पहलवानी करने का शौक हुआ तो ग्रेट खली की अकादमी जोकि जालंधर में है, उसके बारे में पता चला। इसके बाद वहां गईं और ग्रेट खली की अकादमी में एडमिशन लिया। वहां पर कड़ा अभ्यास किया। खली से इस खेल की बारीकियां सीखीं और इसके बाद आज विदेशी महिला रेसलर्स को रिंग में पटकनी देने में कामयाब हो रही हूं।
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