जिंदगी का एक पल ऐसा आया कि बिल्कुल टूट गया था। परिवार वालों से इतने मतभेद हुए की खुद को अनाथ महसूस करने लगा। इसी बीच अकेलेपन को दूर करने के लिए हाथ में कलम थामी और यूं लिखी अपनी पहली किताब।
यह बात शनिवार को दीपक चोपड़ा ने यूटी गेस्ट हाउस में कही। दीपक ने बताया कि उन्होंने अपनी इस किताब मंत्रा फॉर इनर पीस में अपने जीवन से मिली सीख को लिखा है।
उन्होंने कहा कि जीवन में कई बार निराश हो जाते हैं और सोचते हैं कि जिंदगी खत्म, लेकिन हम भूल जाते हैं कि सबसे बड़ी ताकत को, जो हमें भगवान से मिलती है।
दीपक ने अपनी किताब में रिश्तों, काम, जिंदगी में लक्ष्य जैसे मुद्दों पर लिखते हुए अपने जिंदगी के आधार पर मंत्र दिए है। 26 चैप्टर कह इस किताब की कीमत 150 रुपये है।
दीपक ने बताया इस किताब को लिखने के लिए उन्हें कई लेखकों से भी प्रेरणा मिली, जिसमें अमेरिका के लेखक दीपक चोपड़ा और रोबिन सिंह शामिल है।
दीपक यह किताब पीजीआई और अन्य हॉस्पिटल में उन मरीजों को मुफ्त में देंगे, जिनका कोई सगा संबंधी नहीं है। यह किताब रोटरी चंडीगढ़ शिवालिक के सहयोग से प्रकाशित की गई।