आल इंडिया मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजिस्ट एसोसिएशन की चंडीगढ़ यूनिट की ओर से शुक्रवार को वर्ल्ड बायोमेडिकल लेबोरेटरी साइंस डे का आयोजन किया गया। पीजीआई के भार्गव आडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में लैब टेक्नीशियनों के अलावा कई छात्रों ने हिस्सा लिया।
इस मौके पर छात्रों को लेबोरेटरी से जुड़ी बारीकियों के बारे में विस्तार से बताया गया। जीएमएसएच-16 की सीनियर मेडिकल आफिसर डा. आभा सरवाल ने बताया कि सैंपल कलेक्शन से पहले और बाद में हाथ जरूर धोएं। यह मरीज और खुद की सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी होता है।
उन्होंने बताया कि मरीज को जिस दिन सैंपल देने जाना हो, उससे एक दिन पहले उसे नार्मल डाइट लेनी चाहिए। हल्का भोजन खाना चाहिए। इससे रिजल्ट परफेक्ट आते हैं। कई बार देखा गया है कि सैंपल देने के बाद लोगों की रिपोर्ट ठीक से नहीं आती, क्योंकि एक रात पहले उन्होंने या तो ड्रिंक कर रखी होती है या फिर हैवी डाइट ली होती है। जब उनसे पूछा गया कि भिन्न-भिन्न लैब की रिपोर्ट में अंतर क्यों आता है, उनका कहना था कि हर लैब का अपना तरीका होता है। कोई एडवांस तरीके से टेस्ट करता है तो कोई पुरानी टेक्नोलॉजी से। उन्होंने बताया कि दस प्रतिशत तक अंतर कोई मायने नहीं रखता है।
इस मौके पर एसोसिएशन के केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य राकी डेनियल ने कहा कि नर्सिंग और फार्मासिस्ट की काउंसिल बनी हुई है, लेकिन लेबोरेटरी की कोई काउंसिल नहीं है। इससे मरीजों की दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। कोई भी डिप्लोमा व डिग्री लेकर अपनी लैब खोल सकता है, लोग खोल भी रहे हैं। कितनी उनकी ट्रेनिंग है? जो टेस्ट कर रहे हैं, वे कितने सही हैं, इस बारे में कोई जांच नहीं होती।
संसद में जाने कितने वर्षों से बिल पड़ा है, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। एसोसिएशन के स्टेट सेक्रेटरी राजीव कुमार ने बताया कि साइंटिफिक सेमिनार व सीएमई का मकसद छात्रों को इस क्षेत्र में हो रहे नए अपडेट और बारीकियों से अवगत कराना था।