पापा आर्मी में थे.. दिल्ली, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों में रहने का मौका मिला। पढ़ाई में औसत थीं। जब कॉलेज में एडमिशन लेने की बात हुई तो किसी ने यूं कह दिया कि तुम होम साइंस में ही एडमिशन लेना। ये बात मुझे बहुत बुरी लगी और सोचा कि ये मुझे इतना कमजोर समझते हैं। बस फिर क्या था उस दिन ठान ली कि इनको अपनी सफलता से जरूर जवाब दूंगी। यह बात शुक्रवार को मशहूर ब्यूटी एक्सपर्स्ट और सैलून क्लिओपेट्रा की फाउंडर रिचा अग्रवाल ने अमर उजाला के साथ शेयर की।
उन्होंने महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती और हार से कभी घबराना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा, जिंदगी में एक ही सपना देखा। वो था भारत में ऐसा सैलून ओपन करना, जो अभी तक लोगों ने सिर्फ विदेश में सुनने हैं। भारत में तो छोटे छोटे पार्लर हुआ करते थे। यहां सैलून नहीं था। बस फिर क्या था। भले साधन कम थे, बिजनेस का आइडिया नहीं था। लेकिन मेरे सपनों के पंख उड़ना जानते थे। मां-पिता ने हमेशा सहयोग किया। मां की वो पूरी जमा कुंजी मेरे सपनों का मानो शगुन थीं।
मैंने 2003 में मात्र आठ स्टाफ के साथ सिटी में पहला सैलून क्लिओपेट्रा ओपन किया, जहां फेशियल से लेकर इंटरनेशनल स्पा सर्विस दी जाती थीं। सेक्टर-8 से शुरू इस सफर की मंजिल अब 250 स्टाफ और 15 सैलून एवं अकादमी तक पहुंच गई है। मैं यही कहती हूं कभी हार मत मानो, क्योंकि सपनों की उड़ान आपके ही हाथों में है। बस हिम्मत और आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को पूरा करो।