मां की डांट, फटकार पहले तो बुरी लगती है लेकिन सफलता मिलने पर वही डांट, फटकार याद आता है, क्योंकि उसी डांट से हम अपने लक्ष्य को हासिल कर पाते हैं। जब मां की आंखों में एक आशा की किरण दिखती है और हम उम्मीद पर खरा उतरते हुए उनके सपने को पूरा करते हैं तो उस खुशी को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
यह कहना है भारत को 2020 ओलंपिक में शूटिंग में कोटा दिलाने वाले इंटरनेशनल शूटर अंजुम मोदगिल का। अमर उजाला से विशेष बातचीत में अंजुम ने कहा कि महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में कम नहीं हैं। अर्जुन की तरह लक्ष्य भेदने वालीं अंजुम ने कभी अपनी मां की आंखों में देश के लिए स्वर्ण पदक लाने का सपना देखा था।
मां की मेहनत ने अंजुम को जज्बे को और मजबूती दी। गोल्डन गर्ल के नाम से मशहूर अंजुम बतातीं हैं कि उनकी मां शुभ मोदगिल की लगन और तपस्या का ही फल है कि आज वह इस मुकाम पर हैं। नारी शक्ति सशक्तिकरण का उदाहरण पेश करते हुए अंजुम मोदिगल का नाम देश की टॉप महिला शूटर में शामिल हैं।