चंडीगढ़। कामकाजी महिलाएं होने मतलब यह नहीं कि काम करने केबाद वे घर पर जाकर समय व्यतीत करें। काम करने के साथ महिलाआें को शारीरिक फिटनेस पर भी ध्यान देना चाहिए। इसके लिए कसरत करने की भी जरूरत है। यह बात बॉडी बिल्डिंग की प्रोफेशनल एथलीट और पेशे से डॉ. मृदुला ने कहीं।
वह टैगोर थिएटर-18 में बॉडी बिल्डिंग एंड फिजिक चैंपियनशिप में हिस्सा लेने पहुंची थीं। उनकेसाथ कई अन्य महिला प्रतिभागी भी पहुंचीं। टैगोर थिएटर में महिला और पुरुष वर्ग की बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप करवाई गई।
शिक्षण के साथ बॉडी बिल्डिंग भी
डॉ. नुसरत दिलावर रोपड़ के कॉलेज में फिजिकल एजुकेशन की प्रोफेसर हैं। उन्होंने बताया कि वह खुद भी एथलीट रह चुकी हैं, इसलिए फिटनेस के प्रति उनका खासा लगाव है। जिस व्यक्ति को जिम में जाने और बॉडी बिल्डिंग की आदत लग जाती है, वह बिना वर्क आउट किए नहीं रह पाता है। वह सुबह जिम जाती हैं। इसके बाद कॉलेज में पढ़ाती हैं। कॉलेज के बाद शाम को एक-दो घंटे फिर से जिम करती हूं। इससे मेरा अंदर आत्मविश्वास बढ़ता है।
मरीजाें को भी फिट रखने की सलाह
डॉ. मृदुला देश की पहली ऐसी डॉक्टर हैं, जोकि अपने पेशे के साथ-साथ बॉडी बिल्डिंग की प्रोफेशनल कार्ड होल्डर भी हैं। इनका कहना है कि हमें समाज को बताना हैं कि हम महिलाएं पुरुषाें के मुकाबले शारीरिक तौर पर कमजोर नहीं होती। जब लोग मेरी जैसे अन्य महिलाआें को देखते हैं तो उनके सोचने का नजरिया भी बदलता है। अपनी फिटनेस के बारे में डॉ. मृदुला ने बताया कि बॉडी बिल्डिंग करना और फिट दिखना उन्हें अच्छा लगता है। वह उनके पास आने वाले मरीजों को भी फिट रहने की सलाह देती हैं।
फिटनेस डाइट पर निर्भर करती है
फिटनेस ट्रेनर व बॉडी बिल्डर श्रेया दास चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली से पहुंची हैं। उन्होंने बताया कि हर व्यक्ति की फिटनेस उसकी डाइट पर निर्भर करती है। अगर आप फिट रहना चाहते हैं तो आपको अपनी डाइट पर ध्यान देना चाहिए। हमें एक साथ नहीं बल्कि थोड़ा-थोड़ा करके खाना चाहिए।
अधिक चैंपियनशिप हो तो आत्मविश्वास बढ़ता है
चैंपियनशिप में हिस्सा लेने मुंबई से पहुंचे सुमित थापा ने बताया कि बॉडी बिल्डिंग को अन्य खेलों के मुकाबले ज्यादा महत्व नहीं मिलता हैं। अभी सिर्फ साल में 1-2 चैंपियनशिप का आयोजन बड़े स्तर पर किया जाता है। ऐसे में बॉडी बिल्डिंग खेल को बढ़ावा देने के लिए अधिक से अधिक चैंपियनशिप का आयोजन करना चाहिए।