एक साल में नौ लड़कों पर दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज करवाने वाली महिला की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकार के मामले की आरोपी जमानत की हकदार नहीं है।
महिला ने याचिका दाखिल करते हुए बताया था कि वह शिकायतकर्ता के बेटे की दोस्त थी और वह याची का फायदा उठाने की कोशिश करता था। उसने याची को शादी का झांसा देकर अप्राकृतिक यौन संबंध बनाए। इस बारे में याची ने पुलिस को शिकायत भी दी थी। इस शिकायत के कारण ही याची के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज करवा दी गई।
शिकायतकर्ता ने बताया कि उसका बेटा याची का दोस्त था और याची उसे लेकर कहीं घूमने गई थी। वहां पर उसने अश्लीलता आरंभ कर दी जिस पर शिकायतकर्ता के बेटे ने पब्लिक प्लेस होने की दलील देकर उसे दूर कर दिया। इसके बाद कई बार याची ने शिकायतकर्ता के बेटे को फोन किया और घर के बाहर आकर हंगामा भी किया। इसके बाद समझौता करने के लिए दबाव बनाया और इसका प्रयास भी किया।
याचिका पर सुनवाई के दौरान केस में मोड़ तब आ गया, जब हरियाणा सरकार ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि याची गिरफ्तारी से पहले एक साल में नौ लड़कों के खिलाफ दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज करवा चुकी थी। इनमें से तीन मामलों में आरोप फर्जी मिले और याची के खिलाफ पुलिस ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। याची लड़कों को अपने प्यार के जाल में फंसाती है और फिर ब्लैकमेल करती है। याची आदतन ऐसा करती है और ऐसे में जमानत नहीं दी जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि याची पर बेहद संगीन आरोप हैं और ऐसे में वह जमानत की हकदार नहीं है।