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लापरवाहीः इंतकाल बिना ही किसान को बना डाला आठ एकड़ भूमि का मालिक

Sat, 21 Jul 2018 09:19 AM IST
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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हरियाणा के सोनीपत जिले के राई ब्लॉक में कृषि विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। राजस्व रिकार्ड में जिस किसान के नाम एक इंच भूमि का भी इंतकाल नहीं है, पटवारी के कहने पर कृषि विभाग के अधिकारियों ने उसे आठ एकड़ जमीन का मालिक मान लिया। मामला गांव रौलद लतीफपुर का है। गांव के निवासी दलबीर सिंह ने राजेश रौलद प्रोग्रेसर सोसायटी के क्लस्टर में शामिल होकर सब्सिडी वाले उपकरणों के लिए आवेदन किया था। सोसायटी राजेश के नाम पंजीकृत है, इसलिए फाइल उनके नाम से चली। उन्होंने छोटे किसान की श्रेणी में उपकरणों के लिए आवेदन किया था। इसके लिए सभी किसानों की भूमि पांच एकड़ से कम होनी जरूरी है।
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सोसायटी ने पराली प्रबंधन और कृषि उपकरण अस्सी व चालीस प्रतिशत सब्सिडी के साथ खरीदने के लिए अधिक ऑर्डर दिया। इसलिए उनके क्लस्टर को 18 नंबर मिले। इस श्रेणी में दो और भी दावेदार थे, जिनमें से एक के मात्र आठ ही नंबर थे, जबकि दूसरे के उससे ज्यादा। डीसी सोनीपत की देखरेख में ड्रा संपन्न हुआ और तिणाना गांव के केवल आठ नंबर वाले किसान रघुबीर सिंह को उपकरण प्रदान करने के लिए चुना गया।

इससे राजेश रौलद सोसायटी की भौहें तन गईं। उन्होंने जब विभाग से संपर्क साधा तो कृषि अधिकारियों ने बताया, उनकी सोसायटी में आठ एकड़ वाला किसान दलबीर सिंह गांव रौलद लतीफपुर भी शामिल है। इसलिए फाइल रिजेक्ट कर दी गई। चूंकि, आठ एकड़ वाला किसान छोटे किसानों की श्रेणी में नहीं आता। यह सुनकर राजेश हैरान रह गए और उन्होंने दलबीर के साथ मिलकर राजस्व रिकार्ड से जमाबंदी का रिकार्ड निकाला। उसमें दलबीर के नाम बिल्कुल भी जमीन दर्ज नहीं है। क्योंकि, उनके पिता की कुछ समय पहले ही मृत्यु हुई है, और जमीन का इंतकाल उनके नाम अभी नहीं हुआ है।
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इसे देखते हुए राजेश ने पूरे मामले में गड़बड़ी को अंदेशा जताते हुए कृषि उपकरणों के वितरण की जांच कराने की मांग सरकार से की है। उन्होंने सीएम विंडो के अलावा कृषि मंत्री, कृषि विभाग के निदेशक व डीसी सोनीपत को लिखित शिकायत की है। साथ में दस्तावेज भी संलग्न कर दिए हैं।

जांच में होगा दूध का दूध, पानी का पानी : राजेश
रौलद लतीफपुर निवासी राजेश कुमार ने कहा कि कृषि विभाग में सब्सिडी वाले उपकरण मुहैया कराने के नाम पर खूब धांधली हो रही है। चहेतों को लाभ देने के लिए पात्र किसानों की फाइलें मनमानी आपत्तियां लगाकर रिजेक्ट कर रहे हैं। सरकार उनके मामले के साथ ही अन्य जिलों में भी उपकरण वितरण की जांच कराए। इससे दूध का दूध, पानी का पानी होगा। उनके व दलबीर के मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

पटवारी के रिकार्ड पर घिरा कृषि विभाग, अफसरों ने दी सफाई
उपनिदेशक कृषि सोनीपत अनिल सहरावत के पास प्रभावित किसान पहले ही पहुंच चुके हैं। पूरा मामला उनके संज्ञान में है। उनसे शुक्रवार शाम को पूरे मसले पर बातचीत की गई। सहरावत ने मोबाइल अपने अधीनस्थ अधिकारी को सौंप दिया, जो कृषि उपकरणों के वितरण का पूरा काम देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि पटवारी के बताने पर उन्होंने दलबीर को आठ एकड़ भूमि का मालिक माना है, पटवारी के रिकार्ड को वह चैलेंज नहीं कर सकते हैं, न ही उसकी जांच करने का अधिकार है। जिस किसान को चयनित किया गया है, अगर उसे भी रिजेक्ट कर दिया जाए तब भी राजेश रौलद प्रोग्रेसर सोसायटी का नंबर नहीं पड़ेगा।
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