चंडीगढ़ बिजली विभाग के 983 कर्मचारियों को अब बिजली मुफ्त नहीं मिलेगी। ज्वाइंट इलैक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (जेईआरसी) की मीटिंग में यह फैसला हुआ है। सभी कर्मचारियों को मुफ्त बिजली का स्लैब बनाया गया था। इसकी भरपाई न होने पर अब इसे पूरी तरह से बंद करने का फैसला लिया गया है। इसमें बिजली विभाग की ओर से 258 कर्मचारियों को 100 यूनिट, 600 को 125 यूनिट, 125 को 155 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाती थी।
जेईआरसी की ओर से चंडीगढ़ के बिजली विभाग के कर्मचारियों के लिए 90 लाख की मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव बनाया था। यह प्रस्ताव पंजाब इलैक्ट्रिसिटी बोर्ड के 7 जनवरी 2011 के सर्कुलर के आधार पर था। बिजली विभाग के कर्मचारियों के ऑब्जेक्शन के बाद इस प्रस्ताव को जेईआरसी ने निरस्त कर दिया। इससे टैरिफ के पैसे रिकवर नहीं हो पाते थे।
चंडीगढ़ बिजली विभाग के कर्मचारियों को पंजाब इलैक्ट्रिसिटी बोर्ड के कर्मचारियों की तर्ज पर बिजली फ्री दी जा रही थी। जिसका कर्मचारियों ने विरोध किया। कर्मचारियों के विरोध के बाद जेई आरसी ने इसे कैंसल कर दिया है। यूटी पावर मैन यूनियन के जनरल सेक्रेटरी गोपाल दत्त जोशी ने बताया कि बिजली टैरिफ के पैसे रिकवर नहीं हो पाते हैं। इससे बिजली विभाग को घाटा होता है। इसलिए इसे बंद किया जाना चाहिए। बिजली विभाग के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर एमपी सिंह ने बताया कि जेईआरसी की मीटिंग में फैसला हुआ है कि कर्मचारियों को मुफ्त बिजली नहीं दी जाएगी।