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करनाल प्रकरण: गवाही के लिए मिलेंगे दो हफ्ते, इसके बाद होंगे अफसरों और किसानों के बयान

Tue, 12 Oct 2021 05:17 PM IST
Trainee Trainee अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़

सार

गवाहों के बयान दर्ज करवाने के बाद आयोग घटनास्थल का भी दौरा करेगा। करनाल के डीसी, एसपी और तत्कालीन एसडीएम आयुष सिन्हा के साथ किसानों के बयान भी लिए जाएंगे। अधिक से अधिक लोगों की गवाही लेने पर फोकस रहेगा। किसानों को उग्र होने के लिए किसने भड़काया, उस पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी है।
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टोल प्लाजा की सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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करनाल के बसताड़ा टोल प्लाजा प्रकरण की न्यायिक जांच के लिए जस्टिस एसएन अग्रवाल आयोग 11 अक्तूबर से अस्तित्व में आ गया। जांच पूरा होने में एक माह से अधिक का समय लग सकता है। वहीं, गवाही के लिए भी गवाहों को दो हफ्ते का समय दिया जाएगा। आयोग का कार्यभार संभालने के बाद अग्रवाल सोमवार को करनाल पहुंचे और न्यायालय कक्ष के लिए प्रस्तावित स्थल का दौरा किया। जांच आयोग का मुख्यालय पंचकूला के सेक्टर-14 के अलावा करनाल में भी रहेगा। घटना स्थल करनाल में है, इसलिए न्यायालय कक्ष वहीं बनाया जाएगा। आयोग मंगलवार को जांच शुरू होने का नोटिस प्रकाशित करवाएगा। इसमें जानकारी दी जाएगी कि पूरे मामले के बारे में प्रत्यक्षदर्शी बतौर गवाह अपनी गवाही दो हफ्तों के भीतर जस्टिस एसएन अग्रवाल के समक्ष दर्ज करवा सकते हैं।
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किसानों को किसने भड़काया, जांच होगी
गवाहों के बयान दर्ज करवाने के बाद आयोग घटनास्थल का भी दौरा करेगा। करनाल के डीसी, एसपी और तत्कालीन एसडीएम आयुष सिन्हा के बयान भी कलमबद्ध किए जाएंगे। किसानों के बयान भी आयोग दर्ज करेगा। यह कोशिश भी रहेगी कि तटस्थ लोग अधिक से अधिक गवाही दर्ज कराएं ताकि पूरे प्रकरण की तह तक जाया जा सके। इसके साथ ही यह भी पता चल सके कि आयुष सिन्हा के आदेश बसताड़ा टोल प्लाजा व आसपास हुए लाठीचार्ज के संबंध में थे या नहीं। किसानों को उग्र होने के लिए किसने भड़काया। सूत्रों के अनुसार बसताड़ा टोल की घटना की जांच में एक महीने से अधिक समय लगने वाला है। वहीं, पूरे घटनाक्रम के लिए कौन जिम्मेदार है और इसके हालात कैसे बने, इसकी जांच में चार से पांच महीने लग सकते हैं।
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