जुगाड़ गाड़ी में बैठकर भागता अमृतपाल और उसका साथी पपलप्रीत।
- फोटो : सोशल मीडिया।
सरबत खालसा में आतंकी का बयान पढ़ने पर दर्ज हुआ था देशद्रोह का केस
इसके बाद नेवर फॉरगेट 84 वेबसाइट के लिए काम करता रहा। पीड़ित परिवारों के फोटो व आर्टिकल लिखता रहा। इसके बाद उसने विदेश से चल रहे आवाज-ए-कौम पोर्टल और ई-पेपर के लिए भी काम करना शुरू कर दिया। बाद में भिडरांवाले के परिवार के साथ मिलकर भी मीडिया का काम संभालता रहा।
वर्ष 2015 में जेल में बंद आतंकवादी नारायण सिंह चौड़ा का बयान पपलप्रीत सिंह ने सरबत खालसा के दौरान स्टेज से पढ़ा था। इसके बाद उस पर देशद्रोह का केस दर्ज हुआ था। गांव के कुछ युवाओं के साथ विवाद को लेकर भी उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। काफी समय तक पपलप्रीत अंडर ग्राउंड रहा। अमृतपाल के वारिस पंजाब दे संगठन का प्रमुख बनने के बाद उसकी सभी गतिविधियों को पपलप्रीत ही संचालित कर रहा था।
अमृतपाल को गांव से ही गिरफ्तार कर सकती थी पुलिस
अजनाला थाने पर हमले के बाद 22 दिन तक पंजाब पुलिस चंडीगढ़ मुख्यालय में योजना बनाती रही। अब सवाल उठ रहा है कि उसे घर पर ही क्यों नहीं गिरफ्तार किया गया। उसे 100 किलोमीटर का सफर तय कर जालंधर पहुंचने का इंतजार क्यों किया गया। अमृतपाल को पुलिस उसके गांव जल्लूपुर खेड़ा से सुबह पांच बजे ही गिरफ्तार कर सकती थी। तब उसके साथ महज 4-5 ही लोग होते हैं। बता दें कि कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा भी इस पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि अमृतपाल सिंह को गिरफ्तार करना होता तो उसके घर से ही पकड़ा जा सकता था। राजनीतिक फायदा लेने के लिए जालंधर को चुना गया।