पिछले साल गेहूं की फसल खराब होने से लाखों रुपये का नुकसान झेल रहे लोहारी, कालखा, सुताना, आसन खुर्द के सैकड़ों किसानों को सरकार की ओर से मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू की तो प्रभावित किसानों की आंखें खुली की खुली रह गईं। इन गावों के कई किसानों पांच रुपये से लेकर सौ रुपये तक का मुआवजा दिया गया है। इससे नाराज कुछ किसानों ने मुआवजा लेने से इंकार कर दिया।
राजस्व विभाग के आंकड़े के अनुसार लोहारी निवासी सरला को पांच रुपये, पनवेश्वरी देवी को 10 रुपये, जसबीर को 20 रुपये, हरदेई, रोशनी, सुरेश और रामदास को 47 रुपये, विकास व विवेक को 70 रुपये, महाबीर को 85 रुपये, जसमेर, अजमेर व शमशेर को 93-93 रुपये मुआवजा दिया गया है।
वर्ष 2012-13 के दौरान गेहूं के सीजन के समय बेमौसमी और अधिक बारिश हो गई थी। इन गांवों की जमीन में सेम होने के कारण जमीन पानी को नहीं सोख पाई और गेहूं की फसलें खराब हो गईं। इन गांवों में प्रभावित कई किसान खेती पर ही निर्भर हैं।
ऐसे किसानों को उनकी फसल खराब होने का बड़ा धक्का लगा और फसल के खराब होने से उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। अब आस थी तो सरकार द्वारा दिए जाने वाले मुआवजे की ताकि किसान अपने नुकसान की भरपाई कर दैनिक जरूरतों को पूरा सकें, लेकिन सरकार ने मुआवजा इतना कम दिया कि कई किसान तो मुआवजा राशि लेने पटवारी के पास गए ही नहीं। कई किसानों ने गिरदावरी में पक्षपात बरतने के आरोप लगाए हैं।
प्रभावित किसानों की गिरदावरी निष्पक्ष रूप से की गई थी। फसल का मुआवजा जमीन के रिकार्ड के मुताबिक ही दिया जाता है। उस जमीन के जितने मालिक होंगे वह मुआवजा राशि उन सभी में बंट जाती है।
-अरविंद कुमार, कानूनगो
सरकार ने किया भद्दा मजाक
पांच-पांच रुपये मुआवजा देकर सरकार ने किसानों के साथ भद्दा मजाक किया है। सरकार ने किसानों के जले पर नमक छिड़कने का काम किया है। सरकार को चाहिए कि उन्हें 30 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दे।
-सत्यवान शेरा, भाजपा नेता
पांच-पांच रुपये मुआवजा देकर सरकार ने किसानों का अपमान किया है। इनेलो इसका विरोध करता है। किसान हितैषी होने का ढिंढोरा पिटने वाली हुड्डा सरकार का वास्तविक चेहरा सामने आ गया है।
-कृष्ण लाल पंवार, इसराना हलके के विधायक एवं इनेलो नेता