वेस्टर्न आर्मी कमांडर पर जारी डाक टिकट दिखाते कर्नल हरबख्श सिंह
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गांव खाली हो चुका है, भारतीय सेनाओं के गोले सिरों के ऊपर से गुजर रहे
भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारतीय सेना लाहौर तक पहुंच गई थी और वहां के पुलिस थानों पर भारतीय फौज का कब्जा हो चुका था। यह जवानों के शौर्य व साहस का बड़ा उदाहरण था। भले ही बाद में कुछ कूटनीतिक व राजनीतिक कारणों की वजह से सेना को वापस बुलाना पड़ा। इस युद्ध में भारतीय जवानों ने खूब तबाही मचाई थी।
बिग्रेडियर डीएस सराओ (वेटरन) बताते हैं कि उनके पिता मेजर बाद में लेफ्टिनेंट कर्नल एचएस सराओ भी अपने टीम के साथ लाहौर के बर्की तक पहुंचे थे। उन्होंने ही बर्की पुलिस थाने को कब्जे में लिया था। बतौर बैटरी कमांडर उन्होंने पाकिस्तान की एक ऑर्ब्जवेशन पोस्ट पर बमबारी भी करवाई थी जिसमें एक पाकिस्तानी अफसर की मौत हो गई थी। मोर्चे से उन्होंने पाकिस्तानियों के बाइनोकुलर, नक्शे, टेलीफोन सेट, बेनट हथियार समेत कई चीजें जब्त की थीं।
एक पत्र भी वहां से मिला जो लाहौर से मुश्ताक हुसैन ने गुजरांवाला में अपने भाई सैय्यद ताफेल हुसैन को लिखा था। इस पत्र में मुश्ताक ने युद्ध का जिक्र करते हुए बताया था कि यहां लड़ाई जोरों पर है और जब भारतीय सेना की तोपें चलती हैं तो गोले हमारे सिरों के ऊपर से गुजरते हैं। खत बयां करता है कि युद्ध के दाैरान भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान के लाहाैर क्षेत्र में कितनी तबाही मचाई थी।