पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से शिक्षकों की सेवानिवृत्त आयु 65 वर्ष करने के फैसले को चुनौती देने वाली अपील चंडीगढ़ ने सुप्रीम कोर्ट से वापस ले ली है। इसके साथ ही अब शहर के कॉलेजों में कार्यरत 1300 शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष होने का रास्ता साफ हो गया है। बाकी शिक्षकों की सेवानिवृत्ति को लेकर कैट में गुरुवार को सुनवाई होनी है और हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर इन शिक्षकों की याचिका पर फैसला होगा।
कुछ शिक्षकों ने पंजाब की तर्ज पर चंडीगढ़ के कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु को 58 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की मांग को लेकर कैट के समक्ष याचिका दाखिल की थी। कैट ने शिक्षकों की मांग को गलत करार देते हुए याचिका खारिज कर दी थी। कैट के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
हाईकोर्ट ने डॉ. जोगिंदर पाल व अन्य द्वारा दाखिल अपील को मंजूर करते हुए कैट के आदेश को खारिज कर दिया था। यूटी प्रशासन ने इसके बाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ एसएलपी (स्पेशल लीव पिटीशन) दाखिल करते हुए इसे चुनौती दी थी। एसएलपी लंबित रहते अन्य शिक्षकों ने भी कैट में याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट द्वारा डॉ. जोगिंदर सिंह मामले में सुनाए गए आदेश को आधार बनाकर सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने की मांग की थी।
कैट में फिलहाल शिक्षकों की याचिका विचाराधीन है। इसी बीच अब यूटी प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी अपील को वापस ले लिया है। अपील वापस लेने के चलते अब हाईकोर्ट का फैसला ही प्रभाव में रहेगा। गुरुवार को इस केस की कैट में सुनवाई होनी है। ऐसे में अब कैट चंडीगढ़ के कॉलेजों में कार्यरत 1300 शिक्षकों के भविष्य पर फैसला सुनाएगा। चंडीगढ़ गवर्नमेंट कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के महासचिव डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि यह फैसला सराहनीय है।