निर्मल मिल्खा सिंह अपने पति मिल्खा सिंह के साथ।
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कोरोना से जंग हार चुकीं निर्मल मिल्खा सिंह के नाम पर जूनियर लड़के और लड़कियों के वॉलीबॉल टूर्नामेंट शुरू होंगे। निर्मल मिल्खा सिंह यूटी खेल विभाग की पहली ऐसी खेल निदेशक थी, जिन्होंने खेल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पूरी ताकत लगा दी थी। उनके प्रयासों के बाद ही खेल विभाग में पहली बार पक्के तौर पर कोचों की नियुक्तियां शुरू हुई थीं। पहले यूटी शिक्षा विभाग और खेल विभाग इकट्ठा हुआ करते थे। निर्मल मिल्खा सिंह के प्रयासों के बाद यूटी का खेल विभाग अलग से बना। निर्मल मिल्खा सिंह के निधन से शहर में खेलों से जुड़े एसोसिएशन के साथ खेलप्रेमी आहत हुए हैं।
खेल विभाग के लिए सबसे पहले वॉलीबॉल के सेंटर इनकी देखरेख में बनाए गए थे। वह चंडीगढ़ वॉलीबॉल एसोसिएशन की 10 साल तक प्रधान रहीं। वहीं आखिरी समय तक एसोसिएशन की पैट्रन चीफ भी रहीं। वॉलीबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के उप प्रधान और चंडीगढ़ वॉलीबॉल एसोसिशन के मेंबर विजयपाल सिंह ने बताया कि शहर में वॉलीबॉल को मजबूत बनाने के लिए निर्मल मिल्खा सिंह के योगदान को कभी भुलाया नहीं जाएगा। उनकी याद में उनके नाम से जूनियर लड़के और लड़कियों का वॉलीबॉल टूर्नामेंट कराएंगे।
खेल सचिव से मिलकर रखा जाएगा टूर्नामेंट कराने का प्रस्ताव
यूटी खेल विभाग के खेल निदेशक तेजदीप सिंह सैनी ने बताया कि निर्मल मिल्खा सिंह के निधन से यूटी के खेल विभाग को बड़ा नुकसान हुआ हैं। पूरे शहर में खेल का इंफ्रास्ट्रक्चर उन्हीं की ओर से बनाया गया था। विभाग जल्द ही यूटी के खेल सचिव से मिलकर निर्मल मिल्खा सिंह की याद में उनके नाम से टूर्नामेंट कराने का प्रस्ताव रखेगा।
गोल्फ क्लब और मेंबर्स परिवार के साथ
चंडीगढ़ गोल्फ क्लब के प्रधान रविबीर सिंह ने कहा कि मिल्खा सिंह का परिवार क्लब के सबसे सीनियर सदस्यों में से एक है। मिल्खा सिंह, जीव मिल्खा सिंह के साथ निर्मल मिल्खा सिंह का चंडीगढ़ गोल्फ क्लब से काफी लगाव रहा। उनके निधन से पूरा गोल्फ क्लब दुखी है। मिल्खा सिंह अभी अस्पताल में उपचाराधीन हैं। दुख की इस घड़ी में पूरा गोल्फ क्लब उनके परिवार के साथ खड़ा हैं।
वाटर स्पोर्ट्स को दिलाई पहचान
निर्मल मिल्खा सिंह ने शहर में वाटर स्पोर्ट्स का पहला इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करवाया। इसके बाद 1989 में रोइंग की एशियन गेम्स को करवा शहर का नाम इंटनेशनल लेवल पर चमका दिया। लेक क्लब पर पहले रोइंग खिलाड़ियों के लिए कार्बन फाइबर से बनी पहली रोइंग की बोट इन्हीं के प्रयासों से मिली थी। इससे पहले खिलाड़ी वुडन बोट्स पर ही अभ्यास करते थे। चंडीगढ़ रोइंग एसोसिएशन के मौजूदा प्रधान अनमोल रत्न सिद्धू ने दुख जताते हुए कहा कि खेलों में उनके योगदान की कोई भरपाई नहीं कर सकता।
बेहतर प्रशासक रहीं निर्मल मिल्खा सिंह
हॉकी चंडीगढ़ के जनरल सेक्रेटरी अनिल वोहरा ने बताया कि निर्मल मिल्खा सिंह एक बेहतर प्रशासक भी थीं। उनकी बदौलत सेक्टर- 42 में हॉकी स्टेडियम का निर्माण हुआ।