पता चला है कि बैठक में तो फैसला नहीं हो सका था लेकिन शनिवार को चुनाव आचार संहिता लागू होने की खबरों के बीच सीएम ने आनन-फानन भावरा के नाम पर मुहर लगा दी। इस पैनल में भावरा के अलावा दिनकर गुप्ता और प्रबोध कुमार के नाम थे लेकिन इन दोनों अधिकारियों ने पहले ही केंद्र सरकार में डेपुटेशन में जाने की अनुमति मांग रखी थी। यूपीएससी को भेजे गए पैनल में भावरा का नाम सबसे ऊपर रहा।
2017 के चुनाव में सुरक्षा व्यवस्था संभाल चुके हैं भावरा
वीके बावरा 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और इस समय डीजीपी होमगार्ड तैनात थे। वे विजिलेंस चीफ के तौर पर भी काम कर चुके हैं। भावरा पुलिस मेडल मेरिटोरियस सर्विस और डिस्टिंगुइश्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस मेडल के अवार्डी हैं। उन्होंने पंजाब, असम और इंटेलिजेंस ब्यूरो भारत सरकार में अलग-अलग पदों पर शानदार सेवाएं निभाई हैं। वह एसएसपी मानसा, डीआईजी पटियाला रेंज और आईजीपी/बठिंडा के तौर पर भी काम कर चुके हैं। वह डीजीपी/एडीजीपी-इंटेलिजेंस, प्रोविजनिंग और आधुनिकीकरण, सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार, ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन, आंतरिक निगरानी और मानवीय अधिकार और कल्याण के तौर पर पंजाब पुलिस के अलग-अलग विंगों के प्रमुख के तौर पर काम कर चुके हैं।
उन्होंने ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन की सृजन करने में अहम भूमिका निभाई और ब्यूरो के पहले निदेशक के तौर पर भी तैनात रहे हैं। आईटी एंड टी विंग में अपनी तैनाती के दौरान उन्होंने सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट को लागू करने और पंजाब पुलिस की ओर से सोशल मीडिया के क्रियाशील प्रयोग का नेतृत्व किया। वह 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग द्वारा पूरे प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए थे। इस बार भावरा की डीजीपी पद पर नियुक्ति ऐसे समय में हो रही है, जब राज्य में विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है।
पत्रकारिता से जुड़ा है डीजीपी का परिवार
राजस्थान के भरतपुर के बयाना निवासी वीके भावरा के पिता गोपालराम स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं। नौ माह पहले 91 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया था। उनके भाई योगेश भावरा और योगेश की पत्नी वरिष्ठ पत्रकार हैं। वहीं, वीके भावरा की पत्नी भी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं।